वन अधिनियम का उल्लंघन, फिर भी परियोजना की सिफारिश!
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धरमजयगढ़ वनमंडल के अंतर्गत बाकारुमा वन परिक्षेत्र से एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां प्रस्तावित 7.5 मेगावाट जल विद्युत परियोजना की 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन के लिए वन भूमि उपयोग में स्पष्ट अनियमितताएं उजागर हुई हैं। हैरानी की बात यह है कि वन संरक्षण अधिनियम, 1980 का उल्लंघन होने के बावजूद परियोजना को मंजूरी देने की सिफारिश कर दी गई है।
दस्तावेजों और स्थल निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना के लिए कुल 4.50 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग प्रस्तावित है, जिसमें संरक्षित वन और राजस्व वन भूमि शामिल है। इस क्षेत्र में साल प्रजाति के लगभग 280 पेड़ मौजूद हैं, जिनकी कटाई संभावित है। वन का घनत्व 0.4 (मध्यम) दर्ज किया गया है, जो इसे एक सक्रिय वन क्षेत्र दर्शाता है।
सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया है कि बाकारुमा वन परिक्षेत्र के खसरा नंबर 347 और 365 में बिना अनुमति के खुदाई कार्य पहले ही किया जा चुका है। निरीक्षण रिपोर्ट में स्वयं यह स्वीकार किया गया है कि यह कार्य वन संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन है। यानी परियोजना से जुड़ी एजेंसी ने पहले नियम तोड़े और बाद में अनुमति की प्रक्रिया शुरू की।
क्या अब “पहले उल्लंघन करो, फिर मंजूरी लो” ही नई कार्यप्रणाली बन गई है?
निरीक्षण रिपोर्ट में जन हित और रोजगार सृजन का हवाला देते हुए परियोजना को आगे बढ़ाने की सिफारिश कर दी गई !
यह मामला न केवल पर्यावरण संरक्षण, बल्कि कानून के समान अनुपालन और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न भी है !
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