धरमजयगढ़ के पुरुँगा में 621 हेक्टेयर भूमि पर खनन को हरी झंडी की तैयारी ! विभाग ने की सिफारिश ?
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धरमजयगढ़ वन मंडल क्षेत्र के पुरुँगा, साम्हारसिंघा और तेन्दुमुड़ी में बड़े पैमाने पर प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर अहम जानकारी सामने आई हैं, जिनसे स्पष्ट होता है कि 621.331 हेक्टेयर भूमि के उपयोग के लिए वन विभाग ने प्रक्रिया पूरी करते हुए प्रस्ताव को मंजूरी हेतु अनुशंसित कर दिया है। दूसरे शब्दों में कहें तो अब यह मामला अंतिम स्वीकृति की ओर बढ़ रहा है।
सरकारी अभिलेखों के अनुसार, इस परियोजना में 9.982 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग किया जाना प्रस्तावित है, जबकि शेष क्षेत्र गैर-वन श्रेणी में आता है। परियोजना के तहत भूमिगत खनन के साथ-साथ उससे जुड़ी आधारभूत संरचनाओं का विकास किया जाएगा।
यह तथ्य भी सामने आया है कि प्रस्ताव को स्वीकृति दिलाने के लिए सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी की गई हैं। भू-संदर्भित नक्शा और डिजिटल मानचित्र फाइल प्रस्तुत की गई है, वहीं प्रतिपूरक वनीकरण के लिए समान क्षेत्रफल की गैर-वन भूमि चिन्हित कर ली गई है। संबंधित भूमि को विवाद एवं अतिक्रमण से मुक्त बताते हुए वृक्षारोपण के लिए उपयुक्त भी घोषित किया गया है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्तावित क्षेत्र न तो किसी संरक्षित वन क्षेत्र के अंतर्गत आता है और न ही पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र के दायरे में। इसके अलावा, परियोजना से संबंधित कोई न्यायालयीन मामला भी लंबित नहीं पाया गया है। भूमि उपयोग योजना को भी दस्तावेजों के साथ संलग्न किया गया है, जिससे परियोजना की रूपरेखा स्पष्ट होती है।
जानकारी के अनुसार वन विभाग के शीर्ष अधिकारी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने प्रस्ताव का परीक्षण करने के बाद इसे अनुशंसित कर दिया है। साथ ही, राज्य स्तरीय समिति में भी प्रस्ताव पर विचार कर सकारात्मक राय दी गई है, जिससे परियोजना को प्रशासनिक स्तर पर मजबूत समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है।
हालांकि, इतने बड़े क्षेत्र में खनन गतिविधियों को लेकर पर्यावरणीय प्रभाव और स्थानीय स्तर पर इसके असर को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अंतिम मंजूरी के दौरान इन पहलुओं पर किस प्रकार विचार किया जाता है और क्षेत्रीय हितों का संतुलन कैसे साधा जाता है ?
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