विशेष रिपोर्ट: भारतमाला परियोजना के मुआवजे में भारी विलंब, जिससे किसानों का फूटा गुस्सा,
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भारतमाला परियोजना: मुआवजे में देरी ने बढ़ाई किसानों की मुश्किलें,
जिला ब्यूरो: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘भारतमाला परियोजना’ के अंतर्गत अधिग्रहित की गई भूमि के मुआवजे के वितरण में हो रहे अत्यधिक विलंब ने किसानों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। देश के विभिन्न हिस्सों में किसानों ने उचित और समयबद्ध मुआवजे की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है।

आर्थिक संकट की कगार पर किसान
भूमि अधिग्रहण के बाद किसानों को उम्मीद थी कि उन्हें समय पर मुआवजा मिलेगा, जिससे वे अपनी आजीविका के वैकल्पिक साधन जुटा सकेंगे। हालांकि, प्रशासनिक सुस्ती और तकनीकी अड़चनों के कारण भुगतान की प्रक्रिया महीनों से अटकी हुई है। इससे किसानों के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
प्रभावित किसानों ने जताई नाराजगी
मुआवजे की मांग को लेकर ग्राम बुढाडाड़ तहसील पत्थलगांव ज़िला जशपुर के स्थानीय किसान रामलाल, दिनेश, राठिया, नारायण,परदेशी राठिया, कृत राठिया, शौकी प्रधान, मोहन गुप्ता और कई किसान है अन्य ग्रामीणों ने अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है। किसानों का कहना है कि उनकी उपजाऊ जमीन परियोजना के लिए ले ली गई है, लेकिन मुआवजे के नाम पर कुछ राशि दे दी गई हैं, और केवल तारीखें मिल रही हैं।
प्रशासनिक आश्वासन बनाम धरातल की हकीकत
किसानों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा बार-बार आश्वासन तो दिए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर भुगतान की गति अत्यंत धीमी है। कई जिलों में किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मुआवजे का पूर्ण भुगतान नहीं किया गया, तो वे निर्माण कार्य को रोकने और उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विलंब से न केवल किसानों का विश्वास डगमगाता है, बल्कि महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की लागत और समय सीमा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
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