March 25, 2026

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पत्थलगांव: शहर के बीच हाथियों का तांडव, इंदिरा गांधी चौक पर ट्रैफिक सिग्नल को किया धराशायी

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मध्यरात्रि में मचा उत्पात, बड़ा हादसा टला; वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

संवाददाता: उद्घोष समय, पत्थलगांव | दिनांक: 25 मार्च 2026

पत्थलगांव के सबसे व्यस्त और संवेदनशील माने जाने वाले इंदिरा गांधी चौक पर बीती मध्यरात्रि (24 मार्च) हाथि ने अचानक प्रवेश कर जमकर उत्पात मचाया। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हाथियों ने चौक पर लगे मुख्य ट्रैफिक सिग्नल के लोहे के खंभे को उखाड़कर जमीन पर गिरा दिया, जिससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों एवं स्थानीय लोगों के अनुसार घटना देर रात की होने के कारण उस समय चौक पर भीड़भाड़ नहीं थी,गनीमत रही कि घटना देर रात की थी और उस समय चौक पर कोई राहगीर या वाहन मौजूद नहीं था, अन्यथा एक बड़ा हादसा हो सकता था। सुबह होते ही घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्र में सनसनी फैल गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर एकत्रित हो गए।

पत्थलगांव इंदिरा गांधी चौक

वन विभाग की लापरवाही पर उठे सवाल

शहर के हृदय स्थल तक हाथियों के पहुंचने की घटना ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों ने विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई है।

  • ट्रैकिंग सिस्टम पर सवाल: क्या वन विभाग को हाथियों की गतिविधियों की पूर्व जानकारी नहीं थी?
  • अलर्ट सिस्टम की कमी: रिहायशी क्षेत्र के नजदीक हाथियों की मौजूदगी के बावजूद जनता को समय रहते सतर्क क्यों नहीं किया गया?
  • सुरक्षा व्यवस्था कमजोर: मुख्य चौक तक हाथियों का पहुंचना सुरक्षा इंतजामों की पोल खोलता है।

शहर में दहशत, व्यापारियों और नागरिकों में भय

अब तक हाथियों की गतिविधियां मुख्यतः ग्रामीण और वन क्षेत्रों तक सीमित थीं, लेकिन इस घटना के बाद शहरवासियों में भय का माहौल व्याप्त हो गया है। व्यापारियों का कहना है कि यदि यह घटना दिन या शाम के व्यस्त समय में होती, तो भारी जनहानि संभव थी।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि हाथियों की गतिविधियों पर सतत निगरानी रखी जाए और समय-समय पर सार्वजनिक सूचना जारी कर नागरिकों को सतर्क किया जाए।


तत्काल कार्रवाई की मांग

इस घटना को गंभीर चेतावनी मानते हुए नागरिकों ने प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि:

  • हाथियों की लोकेशन की नियमित और पारदर्शी जानकारी दी जाए
  • शहर की सीमा में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए जाएं
  • आपात स्थिति के लिए त्वरित अलर्ट सिस्टम विकसित किया जाए

निष्कर्ष

पत्थलगांव में हुई यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक तैयारी की परीक्षा भी है। समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में यह खतरा और गंभीर रूप ले सकता है।


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