रेल्वे के लिये अधिग्रहित भूमि पर धान बिक्री !धधकते सवालों के “शोले ” ? कौन गब्बर , कौन जय – वीरू और किसने निभाई………. की भूमिका ?
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धरमजयगढ़ – धरमजयगढ़ क्षेत्र के बायसी में सामने आया एक मामला अब प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। शिकायतों के अनुसार, रेलवे परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा चुकी भूमिजिस पर अवार्ड आदेश भी पारित हो चुका है, उस पर भी धान विक्रय दर्ज किए जाने की बात सामने आई है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, संबंधित भूमि का अधिग्रहण रेलवे के लिए पूर्ण किया जा चुका है और विधिवत अवार्ड आदेश पारित हो चुका है। इसके बावजूद, उसी भूमि के आधार पर धान विक्रय दर्ज होना कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है। यदि यह तथ्य जांच में सही पाया जाता है, तो यह न केवल प्रक्रियात्मक चूक बल्कि रिकॉर्ड प्रबंधन और सत्यापन प्रणाली पर भी सवाल उठाता है।
नियमों के अनुसार, अधिग्रहण प्रक्रिया पूर्ण होने और अवार्ड पारित होने के बाद भूमि की स्थिति स्पष्ट रूप से परिवर्तित हो जाती है। ऐसे में उस भूमि के आधार पर कृषि उपज विक्रय का दर्ज होना जांच का विषय बनता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह मुद्दा और भी संवेदनशील बना दिया है कि पंजीयन और सत्यापन की प्रक्रिया किन आधारों पर की गई।
मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज है और इस पहलू की अलग से निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
अधिग्रहित और अवार्ड पारित भूमि पर धान विक्रय कैसे दर्ज हुआ?
फिलहाल, इस पूरे प्रकरण में तथ्य सामने लाने और जवाबदेही तय करने के लिए पारदर्शी एवं त्वरित जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
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