March 15, 2026

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एकेएस विश्वविद्यालय में वर्चुअल माध्यम से आईसीआरआईवेसा–2026 में सतत कृषि और महिला सशक्तिकरण पर वैश्विक वैज्ञानिक मंथन।

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सतना। एकेएस विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग की भागीदारी से आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन 100 से अधिक वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने साझा किए शोध निष्कर्ष।
सतना। एकेएस विश्वविद्यालय, सतना के फैकल्टी ऑफ लाइफ साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा नॉलेज पार्टनर के रूप में “आईसीआरआईवेसा–2026” (रिसर्च, इनोवेशन एंड वीमेन एम्पावरमेंट इन सस्टेनेबल एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट) अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन का सफल आयोजन वर्चुअल माध्यम से किया गया। यह सम्मेलन एडु-मेंटर्स सोसाइटी फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (EDSARD) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
सम्मेलन के संयोजक डॉ. अश्विनी ए. वावू, प्रमुख जैव प्रौद्योगिकी विभाग के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में देश-विदेश के विभिन्न शैक्षणिक और शोध संस्थानों से लगभग 100 वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने भाग लेकर अपने शोध और विचार साझा किए।
दूसरे दिन आयोजित तकनीकी सत्रों, आमंत्रित व्याख्यानों, मौखिक एवं पोस्टर प्रस्तुतियों में सतत कृषि, जैव प्रौद्योगिकी, पर्यावरण विज्ञान तथा उभरती तकनीकों से जुड़े विविध विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
आमंत्रित वक्ता डॉ. विष्णु ओमर ने बायोलॉजिकल कंट्रोल और बायोपेस्टीसाइड को सतत कृषि के लिए पर्यावरण-अनुकूल उपकरण बताते हुए जैविक कीट प्रबंधन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। वहीं डॉ. सुग्यता शिवहरे ने सतत कृषि विकास में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनके योगदान को महत्वपूर्ण बताया।
इसके अतिरिक्त डॉ. कमलेश सोनी ने टैपेटम-स्पेसिफिक टी ए 29 प्रोमोटर के द्वैध नियामक तंत्र पर तथा डॉ. संतोष कुमार ने फसल संरक्षण में वनस्पति आधारित टिकाऊ समाधान विषय पर व्याख्यान दिया।
सम्मेलन में शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने पौधों की तनाव सहनशीलता, माइक्रोबियल बायोरिमेडिएशन, कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग, प्लास्टिक जैव-अपघटन, बायोडीजल उत्पादन, पी जी डी आर आइसोलेशन तथा जलवायु-अनुकूल फसल प्रबंधन जैसे विषयों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। पोस्टर प्रस्तुतियों में मृदा स्वास्थ्य, फसल उत्पादकता, जलवायु लचीलापन और जैविक कृषि पद्धतियों से जुड़े नवाचार भी प्रदर्शित किए गए।
तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता डॉ. महेंद्र तिवारी (डीन, स्टूडेंट वेलफेयर), डॉ. दीपक मिश्रा, डॉ. प्रभात सिंह और डॉ. मोनिका सोनी ने की, जबकि सत्रों का समन्वय डॉ. वीरेंद्र पांडेय, अर्पित श्रीवास्तव, विनय द्विवेदी और पारस कोशे ने किया। सम्मेलन के सफल संचालन में आशुतोष बेहरा (सीईओ एवं संस्थापक, एडु-मेंटर्स) तथा अनिकेत जाखू (एचआर) का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
इस अवसर पर प्रो. कमलेश चौरे, डीन फैकल्टी ऑफ लाइफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी तथा डॉ. शेखर मिश्रा, डीन एकेडमिक्स ने प्रतिभागियों को उत्कृष्ट शोध प्रस्तुतियों और सक्रिय सहभागिता के लिए बधाई देते हुए उनके शोध योगदान की सराहना की।

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