मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर में अवैध रेत उत्खनन का खेल, खनिज अधिकारी पर उठे सवाल
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संभाग ब्यूरो दुर्गा गुप्ता

मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर (एमसीबी) जिला मुख्यालय से महज कुछ किलोमीटर दूर चैनपुर की हसदेव नदी इन दिनों अवैध रेत उत्खनन का बड़ा अड्डा बनती जा रही है। दिनदहाड़े ट्रैक्टर नदी का सीना चीर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। खनिज और राजस्व विभाग की कथित छत्रछाया में यह पूरा खेल फल-फूल रहा है, जिससे सरकार के राजस्व को लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात से लेकर पूरे दिन तक नदी से अवैध तरीके से रेत निकाली जा रही है। मशीनें गरजती हैं, ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खुलेआम भरकर निकलती हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा पसरा है। हैरानी की बात यह है कि जिला प्रशासन की ओर से अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, इसके बावजूद जिला मुख्यालय के इतने करीब यह अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है।
हसदेव नदी, जो क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाती है, आज अंधाधुंध उत्खनन के कारण कराह रही है। नदी का जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो आने वाले महीनों में पेयजल संकट गहराना तय है। नदी के प्राकृतिक बहाव और तटबंधों को नुकसान पहुंच रहा है, जिससे पर्यावरणीय असंतुलन की आशंका भी बढ़ गई है।
सबसे बड़ा सवाल खनिज विभाग की भूमिका को लेकर उठ रहा है। अवैध खनन रोकना और दोषियों पर कार्रवाई करना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। क्षेत्र में चर्चा है कि बिना विभागीय संरक्षण के इतने बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन संभव नहीं। यही कारण है कि उंगलियां सीधे खनिज अधिकारी दयानंद तिग्गा की ओर उठ रही हैं।
*जब इस संबंध में हमारे संवाददाता ने खनिज अधिकारी दयानंद तिग्गा से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की* , तो उन्होंने कॉल उठाना भी जरूरी नहीं समझा। सवाल यह है कि यदि कोई नागरिक या जनप्रतिनिधि अवैध खनन की सूचना देना चाहे, तो वह किससे संपर्क करे? अधिकारी का फोन न उठाना संदेह को और गहरा करता है।
जानकारों का कहना है कि अवैध रेत उत्खनन का यह खेल सिर्फ पर्यावरण और राजस्व को ही नुकसान नहीं पहुंचा रहा, बल्कि वैध खनन कारोबारियों के साथ भी अन्याय है। जिन लोगों ने नियमों के तहत अनुमति ली है, वे सख्त शर्तों में काम करते हैं, जबकि अवैध कारोबारी बिना किसी रोक-टोक के मोटी कमाई कर रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि प्रतिदिन दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रॉली रेत भरकर निकल रहे हैं। यदि एक दिन में लाखों रुपये की रेत निकाली जा रही है, तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि महीने भर में सरकार को कितने राजस्व का नुकसान हो रहा होगा। इसके बावजूद विभागीय अमला दफ्तरों में बैठकर कागजी कार्रवाई तक सीमित है।
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि चैनपुर की हसदेव नदी में चल रहे अवैध उत्खनन की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही, खनिज अधिकारी की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच हो और यदि लापरवाही या मिलीभगत पाई जाए तो सख्त कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता दिखाता है। क्या अवैध खनन पर लगाम लगेगी या फिर हसदेव नदी यूं ही लुटती रहेगी? जनता की निगाहें जिला प्रशासन और खनिज विभाग पर टिकी हैं।
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