“सतना में गुटखा सिंडिकेट का साम्राज्य!”
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प्रशासन मौन क्यों? जनता लुट रही है खुलेआम!
मध्यप्रदेश के सतना जिले में इन दिनों गुटखा कारोबार एक संगठित सिंडिकेट के रूप में फल-फूल रहा है। राजश्री, विमल सहित कई नामी ब्रांड प्रिंट रेट (MRP) से ऊपर खुलेआम बेचे जा रहे हैं — और प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।

खेल कैसे चल रहा है?
बाजार में कृत्रिम कमी का माहौल बनाकर रेट बढ़ाए जा रहे हैं।
छोटे-बड़े दुकानदारों को “ऊपर से तय रेट” पर माल दिया जा रहा है।
हर पैकेट पर 2 से 5 रुपये तक की अतिरिक्त वसूली।
उपभोक्ता विरोध करे तो जवाब — “नहीं लेना तो मत लो!”
यह सिर्फ कालाबाजारी नहीं, जनता की जेब पर सुनियोजित हमला है।
प्रशासन पर सीधा सवाल
क्या खाद्य एवं औषधि विभाग को यह दिखाई नहीं देता?
क्या माप-तौल और वाणिज्यिक कर विभाग की जिम्मेदारी खत्म हो चुकी है?
आखिर किनकी शह पर यह “गुटखा सिंडिकेट” इतना बेखौफ है?
यदि रोज हजारों पैकेट MRP से ऊपर बिक रहे हैं, तो यह सिर्फ दुकानदार की हिम्मत नहीं — प्रशासनिक ढिलाई या मिलीभगत का संकेत है।
जनता पूछ रही है…
क्या छापामार कार्रवाई सिर्फ कागजों में होती है?
क्या कार्रवाई के नाम पर सेटिंग का खेल चलता है?
क्यों नहीं सार्वजनिक रूप से दोषियों के नाम उजागर किए जाते?
कानून क्या कहता है?
MRP से ऊपर बेचना उपभोक्ता संरक्षण कानून का उल्लंघन है। फिर भी बाजार में खुली लूट जारी है। क्या संबंधित अधिकारी जवाबदेह होंगे?
चेतावनी
यदि तत्काल प्रभाव से जांच और कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मुद्दा जनआंदोलन का रूप ले सकता है।
अब समय आ गया है कि प्रशासन जवाब दे —
जनता की जेब काटने वालों पर कब गिरेगी गाज?
यह सिर्फ खबर नहीं, एक चेतावनी है।
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