सतना में 2020 में बने रेलवे टीटी रूम की छत से प्लास्टर गिरना केवल एक दीवार का टूटना नहीं है, यह व्यवस्था की दरकती नींव का संकेत है। चार साल में ही सरकारी निर्माण धराशायी होने लगें तो सवाल उठना स्वाभाविक है — आखिर जिम्मेदार कौन?
देश में भ्रष्टाचार पर बड़े-बड़े भाषण दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। ठेकेदारों से लेकर निरीक्षण करने वाले अधिकारियों तक, यदि जवाबदेही तय नहीं होगी तो “विकसित भारत” केवल नारा बनकर रह जाएगा।
आरक्षण की बहस को लेकर समाज में मतभेद हो सकते हैं, पर असली मुद्दा है — योग्यता और जवाबदेही। किसी भी वर्ग से आने वाला व्यक्ति जब जिम्मेदारी के पद पर बैठता है तो उससे पूर्ण दक्षता और ईमानदारी की अपेक्षा होती है। यदि गुणवत्ता से समझौता हो रहा है, तो यह सिस्टम की विफलता है।
आज जनता पूछ रही है: क्या भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई होगी? क्या तकनीकी जांच सार्वजनिक होगी? क्या दोषियों को सजा मिलेगी?