ए.के.एस. विश्वविद्यालय में संविधान की भावना और सांस्कृतिक चेतना के साथ मनाया गया 77वां गणतंत्र दिवस।
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सतना। देश के 77वें गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2026) के अवसर पर ए.के.एस. विश्वविद्यालय, सतना में राष्ट्रभक्ति,अनुशासन और सांस्कृतिक गरिमा से परिपूर्ण समारोह का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति माननीय श्री बी.पी.सोनी जी के शुभकामना संदेश को सभी के लिए वाचन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत कुलपति प्रो. बी. ए. चोपड़े द्वारा ध्वजारोहण के साथ हुई। उन्होंने परेड की सलामी पी ली। राष्ट्रध्वज फहराते ही राष्ट्रगान की गूंज से समूचा परिसर देशप्रेम से ओत-प्रोत हो उठा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर अनंत कुमार सोनी, प्रतिकुलपति डॉ. हर्षवर्धन, प्रो. आर. एस. त्रिपाठी, डीन अकादमिक डॉ. शेखर मिश्रा, डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ महेंद्र कुमार तिवारी, प्रशासनिक अधिकारी बृजेंद्र कुमार सोनी, कैप्टन रावेंद्र सिंह परिहार,स्पोर्ट्स ऑफिसर सुनील पांडे सहित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, प्राध्यापक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
26 जनवरी का ऐतिहासिक महत्व बताते हुए
अपने संबोधन में कुलपति प्रो. बी. ए. चोपड़े ने कहा कि 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान पूर्ण रूप से लागू हुआ और देश एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न गणराज्य बना। इसी ऐतिहासिक स्मृति में हर वर्ष यह दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि यह दिन संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों को आत्मसात करने तथा मौलिक अधिकारों के साथ मौलिक कर्तव्यों के निर्वहन का संकल्प दोहराने का अवसर है।
77वां गणतंत्र दिवस: युवाओं की निर्णायक भूमिका पर
कुलपति ने कहा कि 2026 में मनाया जा रहा 77वां गणतंत्र दिवस भारत की लोकतांत्रिक यात्रा की निरंतरता और सुदृढ़ता का प्रतीक है। आत्मनिर्भरता, तकनीकी नवाचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में बढ़ते भारत में युवाओं की भूमिका निर्णायक है—वे संविधान के आदर्शों को व्यवहार में उतारें और राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
संस्कृत प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा संस्कृत भाषा में प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। श्लोक-पाठ और भावपूर्ण प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विरासत, संविधान और राष्ट्रप्रेम का प्रभावी संदेश दिया गया, जिसे उपस्थितजनों ने खूब सराहा। *क्यों महत्वपूर्ण है 26 जनवरी*
26 जनवरी भारत के इतिहास का वह स्वर्णिम दिवस है, जब वर्ष 1950 में देश का संविधान पूर्ण रूप से लागू हुआ और भारत एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष एवं लोकतांत्रिक गणराज्य बना। इस दिन देश को अपनी स्वयं की शासन व्यवस्था मिली, जो नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की गारंटी देती है। गणतंत्र दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि यह संविधान के प्रति निष्ठा, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और नागरिक कर्तव्यों के निर्वहन का स्मरण कराता है। यह दिवस प्रत्येक नागरिक, विशेषकर युवाओं को राष्ट्रहित में सजग, अनुशासित और उत्तरदायी भूमिका निभाने की प्रेरणा देता है।
गरिमामय समापन
समारोह के अंत में विश्वविद्यालय परिवार की ओर से विद्यार्थियों एवं सभी उपस्थितजनों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दी गईं। देशभक्ति, सांस्कृतिक चेतना और संविधान के प्रति निष्ठा के संदेश के साथ कार्यक्रम गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियों ने मन मोह लिया ।
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