भ्रष्टाचार का पर्याय बनी अनूपपुर नगर पालिका
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अध्यक्ष–उपाध्यक्ष–सीएमओ की तिकड़ी पर विकास कार्यों में खुली बंदरबांट के आरोप**

अनूपपुर।
शहर के विकास की जिम्मेदारी संभालने वाली अनूपपुर नगर पालिका आज जनता के बीच भ्रष्टाचार की पहचान बनती जा रही है। नगर पालिका अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सीएमओ की कथित तिकड़ी पर आरोप है कि वे मिलकर हर विकास कार्य को कमाई का जरिया बना चुके हैं।
नाली निर्माण, सड़क निर्माण से लेकर नए नगर पालिका भवन तक—हर परियोजना में घटिया सामग्री, अधूरा काम और कागजी पूर्णता का खेल खुलेआम खेला जा रहा है। ठेकेदारों से मिलीभगत कर गुणवत्ता को ताक पर रखा जा रहा है और राशि का आपसी बंदरबांट किया जा रहा है, जबकि शहर की जनता को विकास के नाम पर केवल निराशा हाथ लग रही है।
जमीनी हकीकत बनाम फाइलों का झूठ
नगर में बनी नई सड़कों पर कुछ ही दिनों में गड्ढे उभर आते हैं, नालियां पहली बारिश में ही जवाब दे देती हैं, लेकिन फाइलों में सारे काम “पूर्ण” दिखा दिए जाते हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं होती, क्योंकि हर स्तर पर एक ही तिकड़ी का दबदबा है।
नक्शा पास में खुला खेल, नियमों की खुलेआम अनदेखी
सबसे गंभीर आरोप भवन अनुज्ञा (नक्शा पास) प्रक्रिया को लेकर सामने आ रहे हैं। आरोप है कि बिना स्थल निरीक्षण, बिना सत्यापन और नियमों को नजरअंदाज कर नक्शे धड़ल्ले से पास किए जा रहे हैं। इसके बदले अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सीएमओ से जुड़े कथित शागिर्द मोटी रकम वसूलते हैं।
हैरानी की बात यह है कि हाई टेंशन लाइन के नीचे तक मकान निर्माण की अनुमति दिए जाने के आरोप भी सामने आए हैं, जो सीधे-सीधे नागरिकों की जान से खिलवाड़ है।
नगर विकास या निजी स्वार्थ?
शहरवासियों का सवाल है कि नगर पालिका जनहित के लिए है या फिर कुछ लोगों की निजी तिजोरी भरने का माध्यम बन चुकी है। यदि यही हाल रहा तो अनूपपुर का भविष्य विकास नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की मिसाल बनकर रह जाएगा।
अब देखना यह है कि प्रशासन और जिम्मेदार विभाग इन गंभीर आरोपों पर संज्ञान लेते हैं या फिर नगर पालिका की यह तिकड़ी यूं ही शहर के विकास को निगलती रहेगी।
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