March 2, 2026

Udghosh Samay News

खबर जहां हम वहां

रोजगार के नाम पर सामग्री खेल ? मिट्टी मुरुम सड़क निर्माण में मजदूरी से अधिक सामग्री का भुगतान !

1 min read
Spread the love

धरमजयगढ़,- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत नकना के कुधरीडांड में कराए गए मिट्टी–मुरूम सड़क निर्माण कार्य को लेकर जो तथ्य सामने आए हैं, वे न केवल चौंकाने वाले हैं बल्कि योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल भी खड़े करते हैं। इस कार्य में मजदूरी मद की तुलना में सामग्री मद पर कहीं अधिक राशि का भुगतान किया गया है, जो रोजगार सृजन को केंद्र में रखने वाली योजना की मूल भावना के विपरीत प्रतीत होता है।

उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार इस सड़क निर्माण कार्य में सैकड़ों मानव दिवस का सृजन दर्शाया गया और मजदूरी मद में लगभग 79 हजार रुपये का भुगतान किया गया है। इसके विपरीत सामग्री मद में लगभग तीन लाख छियासठ हजार रुपये से अधिक का भुगतान दर्ज है, जबकि करीब एक लाख पैंतालीस हजार रुपये की राशि अब भी लंबित बताई जा रही है। यानी मजदूरी की तुलना में सामग्री पर कई गुना अधिक खर्च दर्शाया गया है, जो अपने आप में असामान्य स्थिति है।

मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराना है, जिसमें मजदूरी का अनुपात प्रमुख और सामग्री का अनुपात सीमित रखा जाता है। ऐसे में मजदूरी से कहीं अधिक सामग्री भुगतान का सामने आना यह संकेत देता है कि कार्य को श्रम-प्रधान रखने के बजाय सामग्री-प्रधान बना दिया गया। इससे यह आशंका गहराती है कि सामग्री की मात्रा, दर या उपयोग को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया हो। 


समग्र रूप से देखें तो मजदूरी से अधिक सामग्री भुगतान और कार्य में अनिश्चिता की स्थिति यह स्पष्ट करती है कि इस सड़क निर्माण कार्य में सब कुछ सामान्य नहीं है।
इस पूरे प्रकरण में ग्राम पंचायत स्तर से लेकर तकनीकी और भुगतान से जुड़े अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। रोजगार सहायक, पंचायत सचिव और संबंधित तकनीकी अधिकारियों की जवाबदेही तय किए बिना यह स्पष्ट नहीं हो पाएगा कि यह मामला लापरवाही का है या सुनियोजित वित्तीय अनियमितता का। ग्रामीणों के बीच भी इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि सड़क निर्माण के नाम पर कहीं सरकारी धन का दुरुपयोग तो नहीं किया गया। बहरहाल ये तो एक पंचायत के एक काम का ही लेखा जोखा है , जनपद पंचायत के कई ग्राम पंचायतों में ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है, जो योजना के क्रियान्वयन और जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रहे हैं !

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

[join_button]
WhatsApp