गरीबी और संघर्ष को पछाड़कर सफलता का शिखर: वीरेंद्र राठिया ने बढ़ाया समाज का मान
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धरमजयगढ़ क्षेत्र के पीपरमार वार्ड से निकलकर आदिवासी समाज का नाम रोशन करने वाले वीरेंद्र राठिया ने कठिन परिस्थितियों और निरंतर संघर्ष के बीच एमडी मेडिसिन में चयन पाकर एक मिसाल कायम की है। शासकीय मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में एमडी मेडिसिन के लिए चयनित होकर उन्होंने न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे राठिया और कंवर आदिवासी समाज का गौरव बढ़ाया है।
पीपरमार वार्ड के पूर्व पार्षद सुरेश राठिया एवं वर्तमान पार्षद माधो बाई राठिया के पुत्र वीरेंद्र राठिया प्रारंभ से ही मेधावी छात्र रहे हैं। उन्होंने धरमजयगढ़ के साईं बाबा कॉन्वेंट स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की, इसके बाद नवोदय विद्यालय भूपदेवपुर में चयनित होकर बारहवीं तक अध्ययन किया।
बारहवीं के उपरांत वीरेंद्र ने छत्तीसगढ़ पीएमटी में पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के लिए चयन प्राप्त किया। आर्थिक अभाव और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और कड़ी मेहनत से एमबीबीएस की पढ़ाई पूर्ण कर डॉक्टर बने। इसके बाद उच्च चिकित्सा शिक्षा के लिए किए गए सतत प्रयासों का परिणाम रहा कि अब उनका चयन एमडी मेडिसिन के लिए शासकीय मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में हुआ है।
वीरेंद्र राठिया की यह उपलब्धि आदिवासी अंचल के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उनकी सफलता यह प्रमाणित करती है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी संकल्प, अनुशासन और परिश्रम के बल पर बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। उल्लेखनीय है कि वीरेंद्र के छोटे भाई भी वर्तमान में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं, जो इस परिवार की शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
वीरेंद्र की सफलता पर धरमजयगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों में हर्ष का माहौल है। जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने उन्हें शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र और आदिवासी समाज के आत्मविश्वास को मजबूत करने वाली है। वीरेंद्र राठिया की यह संघर्ष से सफलता तक की यात्रा आने वाली पीढ़ियों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहेगी।
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