शहर में बढ़ती ठंड से राहत देने के नाम पर नगर पालिका द्वारा किए जा रहे अलाव महज औपचारिकता बनकर रह गए हैं। कई प्रमुख चौक-चौराहों पर गीली लकड़ियां डालकर अलाव जलाया गया, जिससे आग जलने के बजाय धुआं ही उठता नजर आया। ठंड से राहत मिलने के बजाय राहगीरों और जरूरतमंदों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पालिका द्वारा हर वर्ष अलाव के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। गीली लकड़ी डालने से न तो आग ठीक से जल पाती है और न ही लोगों को गर्मी मिलती है।
इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी अलाव की व्यवस्था को लेकर अपनी पीठ थपथपाते नजर आए। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि शिकायत के बाद भी किसी अधिकारी ने व्यवस्था सुधारने की जहमत नहीं उठाई।
शहरवासियों ने मांग की है कि अलाव की व्यवस्था को दिखावा न बनाकर वास्तव में जरूरतमंदों के लिए प्रभावी बनाया जाए, ताकि ठंड से राहत मिल सके।