महिला जनप्रतिनिधियों के परिजनों को प्रॉक्सी प्रतिनिधि बनाने पर रोक, शासन ने जारी किया आदेश
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संभाग ब्यूरो दुर्गा गुप्ता

नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रदेश के समस्त नगरीय निकायों में महिला जनप्रतिनिधियों के परिजनों को प्रॉक्सी प्रतिनिधि के रूप में कार्य कराने पर सख्त रोक लगा दी है। इस संबंध में शासन ने 12 दिसंबर 2025 को आदेश जारी कर सभी नगर निगम आयुक्तों, मुख्य नगर पालिका अधिकारियों और नगर पंचायतों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
शासन द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि कई नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के स्थान पर उनके पति, पुत्र अथवा अन्य परिजन बैठकों व शासकीय कार्यों में भाग ले रहे हैं, जो कानूनन अनुचित है। यह व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद 14, 15(3) एवं 21 का उल्लंघन मानी जाएगी।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम 1956 एवं नगर पालिका अधिनियम 1961 के तहत केवल निर्वाचित जनप्रतिनिधि ही अपने पद का दायित्व निभा सकते हैं। किसी भी स्थिति में उनके परिजनों को प्रतिनिधि या लायजन पर्सन के रूप में कार्य करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
शासन ने सभी आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जांच कर यह सुनिश्चित करें कि कहीं भी महिला जनप्रतिनिधियों के स्थान पर उनके परिजन कार्य नहीं कर रहे हैं। यदि ऐसा पाया जाता है तो तत्काल कार्रवाई कर शासन को अवगत कराया जाए।
यह निर्देश राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पत्र के परिपालन में जारी किया गया है, जिसमें महिला जनप्रतिनिधियों के अधिकारों की रक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
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