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हाथियों के जंगल पर कोल ब्लॉक का खतरा, नवागांव में ग्रामीणों का कड़ा विरोध

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पुरुँगा में मेसर्स अंबुजा सीमेंट लिमिटेड के खिलाफ उठी विरोध की चिंगारी अब पूरे क्षेत्र में दहकती आग में तब्दील होती जा रही है। पुरुँगा से शुरू हुआ जनआंदोलन अब गांव-गांव फैल चुका है और इसका सीधा प्रमाण ग्राम पंचायत नवागांव में देखने को मिला, जहाँ नवागांव सहित आसपास के कई गांवों के सैकड़ों ग्रामीण एकजुट होकर सड़क पर उतरे। 


ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में साफ कर दिया कि किसी भी कीमत पर अपने जल, जंगल और जमीन को कोयला खदानों के हवाले नहीं किया जाएगा। विरोध की शुरुआत पेड़ों की पूजा से कर यह संदेश दिया गया कि जिन जंगलों को उजाड़ने की तैयारी है, वही जंगल उनके लिए भगवान हैं और वही उनका जीवन हैं। विदित हो कि धरमजयगढ़ वन मंडल जंगली हाथियों का प्रमुख इलाका माना जाता है। यहां साल भर हाथियों के झुंड जंगलों में घूमते रहते हैं। छाल और धरमजयगढ़ रेंज के जंगल सबसे घने हैं, लेकिन इन्हीं इलाकों में 18 कोल ब्लॉक चिन्हांकित किए जाने से आदिवासी समाज में नाराजगी बढ़ गई है।
इन 18 कोल ब्लॉकों में से अब तक 6 की नीलामी हो चुकी है। दुर्गापुर-2 तराईमार और दुर्गापुर-2 सरिया कोल ब्लॉक कर्नाटक पावर लिमिटेड को दिए गए हैं। इसके अलावा सेरबन, दुर्गापुर–शाहपुर, इंद्रमणि और अंबुजा–अडानी का पुरुंगा कोल ब्लॉक भी शामिल है। बाकी 12 कोल ब्लॉकों में नवागांव ईस्ट, नवागांव वेस्ट, ओंगना–पोटिया, कोइलार, चैनपुर, रामनगर, तेंदुमुरी, बोजिया, फतेपुर, फतेपुर ईस्ट, वेस्ट ऑफ बायसी और छाल कोल ब्लॉक हैं।
सोमवार को ग्राम नवागांव में ग्रामीणों ने इन कोल ब्लॉकों के खिलाफ विरोध किया। आदिवासी समाज ने जंगल में पूजा कर हाथियों की सुरक्षा की कामना की और इसके बाद नारेबाजी करते हुए नवागांव ईस्ट और नवागांव वेस्ट कोल ब्लॉक की नीलामी रोकने की मांग की।
ग्रामीणों ने कहा कि यह इलाका पांचवीं अनुसूची में आता है और यहां पेसा कानून लागू है। ग्रामसभा की अनुमति के बिना किसी भी तरह की नीलामी या खनन को वे स्वीकार नहीं करेंगे।
29 दिसंबर को होगा बड़ा आंदोलन
कोल ब्लॉकों के विरोध में लगातार बैठकें हो रही हैं। नवागांव में हुई बैठक में आसपास के कई गांवों के लोग शामिल हुए। तय किया गया कि 29 दिसंबर को हजारों ग्रामीण रैली और आमसभा कर 18 कोल ब्लॉकों को निरस्त करने और नई नीलामी पर रोक की मांग करेंगे।
ग्रामीणों ने साफ कहा है कि अगर जंगल, जमीन और हाथियों की सुरक्षा से समझौता किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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