धान खरीदी व्यवस्था पर सवाल? जमरगी डी मंडी में बनी विवाद क़ी स्थिति !
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धरमजयगढ़ तहसील के जमरगी डी धान उपार्जन केंद्र में धान खरीदी की प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। किसानों को 21 क्विंटल धान खरीदी का टोकन जारी होने के बावजूद खरीदी की मात्रा को लेकर उत्पन्न असमंजस ने न केवल खरीदी प्रक्रिया को प्रभावित किया, बल्कि पूरी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए।
स्थिति उस समय बिगड़ी जब खरीदी की शर्तों को लेकर स्पष्ट जानकारी न मिलने से असंतुष्ट किसानों ने अस्थायी रूप से धान विक्रय रोक दिया। धान से लदे वाहन मंडी परिसर के बाहर खड़े कर दिए गए, जिससे खरीदी केंद्र पर गतिविधियां ठप हो गईं। किसानों का कहना था कि जब टोकन पर निर्धारित मात्रा स्पष्ट है, तो खरीदी के समय भ्रम की स्थिति क्यों उत्पन्न हो रही है।
मामले की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसानों से संवाद कर स्थिति को सामान्य करने का प्रयास किया। एहतियात के तौर पर पुलिस बल की भी तैनाती की गई। बातचीत के दौरान किसानों ने खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता, स्पष्ट दिशा-निर्देश और समान व्यवहार की मांग उठाई।
इसी दौरान भाजपा मंडल अध्यक्ष धरमजयगढ़ भरत लाल साहू ने मौके पर पहुंचकर प्रशासन और किसानों के बीच समन्वय स्थापित करने में भूमिका निभाई। चर्चा के बाद पटवारी सत्यापन के आधार पर धान विक्रय किए जाने पर सहमति बनी, जिसके बाद खरीदी प्रक्रिया दोबारा शुरू हो सकी।
हालांकि, यह पूरा घटनाक्रम यह सोचने पर मजबूर करता है कि प्रशासन की सतत निगरानी के बावजूद धान खरीदी व्यवस्था में बार-बार असमंजस की स्थिति क्यों बन रही है? क्या जमीनी स्तर पर दिशा-निर्देशों की कमी है, या फिर व्यवस्था के क्रियान्वयन में तालमेल का अभाव है? जमरगी मंडी की यह स्थिति न केवल किसानों की परेशानी को उजागर करती है, बल्कि खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता और प्रभावशीलता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है।


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