छत्तीसगढ़ नागवंशी समाज केंद्र घुघरी में भव्य गौरव दिवस एवं महासम्मेलन का आयोजन
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घुघरी | 19 दिसंबर 2025
छत्तीसगढ़ नागवंशी समाज केंद्र घुघरी में आज दिनांक 19 दिसंबर 2025 को नागवंशी समाज का गौरव दिवस एवं महासम्मेलन अत्यंत गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस ऐतिहासिक आयोजन में समाज के वरिष्ठजनों, युवाओं एवं जनप्रतिनिधियों की उल्लेखनीय सहभागिता देखने को मिली।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि पत्थलगांव विधानसभा की लोकप्रिय विधायिका श्रीमती गोमती साय जी रहीं। उनके साथ इस अवसर पर पूर्व जिलाध्यक्ष श्री सुनील गुप्ता जी, मंडल अध्यक्ष श्री प्रतीक सिंह जी, जनपद अध्यक्ष बगीचा श्रीमती गंगोत्री नागेश जी, श्री लखुराम जी, नागवंशी कल्याण युवा समिति के अध्यक्ष श्री संतकुमार नाग जी, प्रतियां अध्यक्ष श्री संतकुमार नाग जी, उपाध्यक्ष श्री विजय कुमार नाग जी, रक्त प्रभारी श्री लोकनाथ नाग जी सहित समाज के समस्त वरिष्ठ बंधुजन एवं गणमान्यजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

सभा को संबोधित करते हुए विधायिका श्रीमती गोमती साय जी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी संस्कृति, परंपरा एवं धर्म की रक्षा करें। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी प्रकार के बहकावे या प्रलोभन में आकर अपने मूल धर्म और संस्कारों से विमुख न हों। साथ ही उन्होंने ऐसे सामाजिक आयोजनों को समाज की एकता और जागरूकता के लिए अत्यंत आवश्यक बताया। इस अवसर पर उन्होंने मंच निर्माण हेतु 3 लाख रुपये की घोषणा कर समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाया।

नागवंशी कल्याण युवा समिति के अध्यक्ष श्री संतकुमार नाग जी ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि नागवंशी समाज को अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर संघर्ष करना होगा। उन्होंने समाज की आठवीं अनुसूची में शामिल होने की मांग को लेकर केंद्र स्तर पर ठोस प्रयास करने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि एकजुटता से ही आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है।
वहीं प्रांतीय उपाध्यक्ष श्री विजय नाग जी ने अपने भावपूर्ण संबोधन से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने समाज की एकता को तुलसी की माला से जोड़ते हुए कहा—
“जब तक हम एक धागे में पिरोए रहेंगे, तब तक नागवंशी समाज कहलाएंगे; अगर धागा टूटा तो नाग अलग-अलग हो जाएंगे।”
उनका यह संदेश समाज में एकता, अनुशासन और सामूहिक चेतना का प्रतीक बना।
कार्यक्रम के अंत में समाज के सभी वरिष्ठजनों, अतिथियों एवं उपस्थित बंधुओं के प्रति आभार व्यक्त किया गया तथा नागवंशी समाज के उज्ज्वल भविष्य, एकता और निरंतर प्रगति की कामना की गई।
यह गौरव दिवस न केवल समाज की उपलब्धियों का स्मरण रहा, बल्कि आने वाले समय में संगठन, संघर्ष और संस्कृति संरक्षण का मजबूत संकल्प भी बनकर उभरा।
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