डीबीएल की मनमानी चरम पर, शासकीय अमृत सरोवर को किया बर्बाद !
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धरमजयगढ़–उरगा से पत्थलगांव तक निर्माणाधीन भारतमाला सड़क परियोजना एक बार फिर गंभीर विवादों में घिरती नजर आ रही है। परियोजना से जुड़ी डीबीएल कंपनी की कथित मनमानी का एक और चौंकाने वाला मामला धरमजयगढ़ विकासखंड के सीसरिंगा ग्राम पंचायत से सामने आया है, जहां शासन की महत्वाकांक्षी योजना अमृत सरोवर के तहत लाखों रुपये की लागत से निर्मित शासकीय तालाब को खोदकर पूरी तरह तहस-नहस कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार, जनहित में बनाए गए इस तालाब को डीबीएल कंपनी ने अपने स्वार्थ के लिए मिट्टी उत्खनन का केंद्र बना दिया। सरपंच और ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के किसान ज्ञानदास महंत द्वारा निजी भूमि पर खेत निर्माण के लिए मिट्टी निकालने की अनुमति के नाम पर भारतमाला परियोजना से जुड़े डीबीएल कंपनी के जिम्मेदारों से बातचीत हुई थी, लेकिन इसके बाद निजी जमीन के साथ-साथ शासकीय अमृत सरोवर तालाब की भी बेतहाशा खुदाई कर दी गई। देखते ही देखते तालाब की संरचना नष्ट हो गई और शासन की संपत्ति को गंभीर क्षति पहुंची।
ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। धरमजयगढ़ क्षेत्र में डीबीएल कंपनी के खिलाफ पहले भी अवैध उत्खनन, मनमाना निर्माण और नियमों की अनदेखी से जुड़ी कई शिकायतें सामने आ चुकी हैं, जिनकी सूची लगातार लंबी होती जा रही है। इसके बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित सरपंच और जागरूक ग्रामीणों ने धरमजयगढ़ एसडीएम और जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से मिलकर औपचारिक शिकायत दर्ज करा दी है। ग्रामीणों की मांग है कि शासकीय तालाब को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाए और अमृत सरोवर की पुनर्बहाली सुनिश्चित की जाए।

अब सबकी निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। क्या शासन की जनकल्याणकारी योजना के साथ हुई इस कथित तोड़फोड़ पर कार्रवाई होगी या फिर भारतमाला परियोजना के नाम पर डीबीएल कंपनी की मनमानी यूं ही चलती रहेगी—यह आने वाला वक्त बताएगा।
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