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March 3, 2026

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जंगली हाथियों के संरक्षण और वन क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर निर्णायक आंदोलन, 22 दिसंबर को धरमजयगढ़ में ‘जंगी रैली’, 118 ग्राम पंचायतों की सहभागिता

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धरमजयगढ़ – धरमजयगढ़ अंचल अब केवल एक सामान्य वन क्षेत्र नहीं, बल्कि जंगली हाथियों का अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास बन चुका है। लगभग 1,71,341.9 हेक्टेयर में विस्तृत यह वन क्षेत्र छह वन रेंजों में विभाजित है, जिनमें छाल और धरमजयगढ़ रेंज सर्वाधिक सघन वनाच्छादन वाले इलाके हैं। इन रेंजों में वर्षभर हाथियों का स्वाभाविक विचरण बना रहता है। बीते 21 दिसंबर 2001 से अब तक हाथी–मानव संघर्ष में 113 ग्रामीणों की मृत्यु तथा विभिन्न कारणों से 54 जंगली हाथियों की जान जा चुकी है, जो इस क्षेत्र की संवेदनशीलता और गंभीरता को रेखांकित करता है। ऐसे में इन्हीं इलाकों में 18 कोल ब्लॉकों का प्रस्ताव सामने आना वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा, दोनों दृष्टियों से गंभीर चिंता का विषय बन गया है। 

धरमजयगढ़ वन मंडल की छाल और धरमजयगढ़ रेंज में भारत सरकार के कोयला मंत्रालय द्वारा कुल 18 कोल ब्लॉक चिन्हांकित किए गए हैं। इन प्रस्तावित परियोजनाओं से 52 ग्राम पंचायतों के हजारों ग्रामीण प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होंगे। प्रस्तावित कोल ब्लॉकों में बायसी, चैनपुर, छाल, दुर्गापुर-शाहपुर (एसईसीएल), फतेपुर, दुर्गापुर-2 (सरिया), दुर्गापुर-2 (तराईमार), फतेपुर इष्ट, नवागांव इष्ट, नवागांव बेस्ट, बोजिया, ओंगना-पोटिया, मेसर्स अंबुजा सीमेंट्स/अडानी पुरुंगा, रामनगर, शेरबन, तेंदुमुरी, बेस्ट ऑफ बायसी तथा कोईलार कोल ब्लॉक प्रमुख रूप से शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन परियोजनाओं से हाथियों के प्राकृतिक आवास खंडित होंगे, जिससे मानव–हाथी संघर्ष और अधिक तीव्र होने की आशंका है। 

इस गंभीर परिस्थिति पर विचार-विमर्श हेतु ग्राम पंचायत पुरुंगा के स्कूल परिसर में प्रभावित ग्रामों के सरपंचों और बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला-पुरुषों की उपस्थिति में एक निर्णायक बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि 22 दिसंबर को धरमजयगढ़ में विशाल ‘जंगी रैली’ आयोजित की जाएगी। इस रैली में 118 ग्राम पंचायतों के ग्रामीण एकजुट होकर जंगली हाथियों के संरक्षण, वन क्षेत्र की सुरक्षा और कोल ब्लॉकों के निरस्तीकरण की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे। बैठक में यह भी तय हुआ कि रैली के उपरांत उपखंड अधिकारी के माध्यम से केंद्र एवं राज्य सरकार के सात प्रमुख संवैधानिक और प्रशासनिक पदाधिकारियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा। यह ज्ञापन राष्ट्रपति महोदया, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव, केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी, राज्यपाल छत्तीसगढ़, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (नई दिल्ली) के अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष तथा छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं पर्यावरण विभाग को संबोधित होगा। ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में छाल और धरमजयगढ़ रेंज के कुल 36,041.711 हेक्टेयर क्षेत्र को हाथी रिज़र्व घोषित करना, प्रस्तावित छह कोल ब्लॉकों को पूर्णतः निरस्त करना तथा शेष 12 कोल ब्लॉकों की नीलामी पर तत्काल रोक लगाना शामिल है। ग्रामीणों का स्पष्ट और दो टूक कहना है कि उनके लिए कोयला नहीं, बल्कि जीवन, जंगल और भविष्य की सुरक्षा सर्वोपरि है। हाथियों और इंसानों के बीच बढ़ते टकराव को रोकने तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए अब निर्णायक और दूरदर्शी नीति की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य के साथ ‘जंगी रैली’ की तैयारियां पूरे क्षेत्र में तीव्र गति से जारी हैं।

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