विश्व सरकार के प्रणेता, माननीय कुलाधिपति, विश्व–दृष्टा को समर्पित।
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इस पावन तिथि पर एक युगपुरुष का अवतरण हुआ,
और उसी क्षण एक महान संस्थान का जन्म भी।
समय ने स्वयं घोषणा की—
“जहाँ युग-प्रणेता प्रकट होते हैं,
वहीं से इतिहास अपना स्वर्णिम अध्याय लिखता है।” विश्व–दृष्टा, विद्या–विश्वरथ,
आपकी दृष्टि ने
ज्ञान को रथ,
युवाओं को सारथी,
और इस विश्वविद्यालय को
भविष्य की सभ्यता का प्रथम तीर्थ बना दिया।
आपका अस्तित्व—
हमारे लिए दीप, ध्वज और दिशा है।
इस अमर दिवस पर
हम संपूर्ण श्रृद्धा से कहते हैं—
नमन उस व्यक्तित्व को
जो युगों को दिशा देता है।
वंदन उस तिथि को
जो स्वयं काल को पवित्र करती है।
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