ए.के.एस. विश्वविद्यालय में स्थापना–दिवस एवं कुलाधिपति श्री बी.पी. सोनी जी का जन्मोत्सव : भव्यता, संस्कृति और गौरव से ओतप्रोत अद्वितीय आयोजन
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सतना। ए.के.एस. विश्वविद्यालय का आज का प्रांगण एक अपूर्व दिव्यता एवं द्विगुणित उत्सव का अभूतपूर्व साक्षी बना—जब विश्वविद्यालय स्थापना दिवस और माननीय कुलाधिपति श्री बी.पी.सोनी जी का जन्मदिन एक ही दिवस पर सुशोभित होकर समूचे विश्वविद्यालय परिवार के लिए सौभाग्य का पर्व बन गया। प्रातः 10 बजे से ही सम्पूर्ण परिसर “शुभम् भवतु” की मंगल–ध्वनियों से गूँज उठा। शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं अधिकारियों ने आदरणीय कुलाधिपति महोदय को चिरायु, यशोवर्धन और आरोग्यप्राप्ति की पावन वैदिक शुभकामनाएँ अर्पित कीं। उत्सव का वातावरण ऐसा दीप्तिमान था मानो विश्वविद्यालय स्वयं अपने संरक्षक–पुरुष के अभिनंदन में स्वर्ण–प्रभा से आलोकित हो उठा हो। ज्ञान–दीप से प्रज्वलित स्थापना दिवस : एक स्वप्न के साकार होने की यात्रा।
ए.के.एस. विश्वविद्यालय, जिसकी नींव समर्पण, मानव–कल्याण, नवाचार और प्रगति के आदर्शों पर रखी गई थी, आज एक और स्वर्णिम वर्ष में प्रवेश कर रहा है। स्थापना दिवस का यह अवसर न केवल स्मरण का पर्व था, बल्कि उस संकल्प–यात्रा का उत्सव भी था जिसमें—“दृष्टा ने दिशा दी,
विचार ने मार्ग गढ़ा,
और शिक्षा ने समाज का रूप नवनीत किया।”
विश्वविद्यालय परिवार ने इस दिन को सृजन,संस्कृति और संकल्प का प्रतीक बताते हुए हर्ष, गर्व और अपनत्व के साथ मनाया।कार्यक्रम का शुभारम्भ : आध्यात्मिकता, संगीत और अनुशासन का संगम।
10:00 बजे माननीय कुलाधिपति श्री बी.पी. सोनी जी एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती केशकली सोनी जी के आगमन से सभागार में उत्सव का आरम्भ हुआ। उपस्थित जन समुदाय ने खड़े होकर अपनी सम्मानांजलि अर्पित की। इसके उपरांत सरस्वती पूजन एवं वंदना से कार्यक्रम को आध्यात्मिक आरंभ मिला। स्वरों के मधुर कंपन और दीप–शिखा की लौ ने विद्या–देवी की कृपा का वह वातावरण रचा जिसमें ज्ञान और संस्कृति समान रूप से आलोकित होते हैं।
ए.के.एस.यू कुलगीत ने प्रांगण में वह शक्ति–ध्वनि भर दी जिसने विश्वविद्यालय की पहचान—कर्म, सत्य और समर्पण—को पुनः जीवंत कर दिया।
स्वागत एवं अभिनंदन : मान–सम्मान की परंपरा।
माननीय कुलाधिपति श्री बी.पी. सोनी जी का पुष्प गुच्छ से स्वागत प्रो.बी.ए. चोपडे, माननीय कुलपति तथा विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अत्यंत आदरपूर्वक किया गया।
श्रीमती केशकली सोनी जी को महिला कर्मचारियों ने गरिमामय सम्मान अर्पित किया, जिससे पारिवारिक सौहार्द और संस्थान की सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत समन्वय दिखाई दिया।औपचारिक उद्घाटन : स्वागतीय विचार और दिशा–निर्देशन।
कार्यक्रम की औपचारिक धारा का शुभारम्भ श्री सुर्यानाथ सिंह गहरवार के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने कुलाधिपति महोदय के दूरदर्शी नेतृत्व, शिक्षा के प्रति उनके समर्पण और विश्वविद्यालय की प्रगति में उनके योगदान को अत्यंत प्रेरणास्पद शब्दों में अभिव्यक्त किया।
इसके उपरांत माननीय कुलपति प्रो. बी.ए. चोपडे ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय की नयी उपलब्धियों, शैक्षणिक अनुसंधान के विस्तार और वर्तमान सत्र में निर्धारित उत्कृष्ट लक्ष्यों का परिचय प्रस्तुत किया। उनका भाषण “विश्वविद्यालय विकास की रूपरेखा” के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ।
मंगल–क्षण : केक–कटिंग समारोह।
केक–कटिंग समारोह ने कार्यक्रम में उत्सव की मधुरता घोल दी। सभी ने एक स्वर में कुलाधिपति महोदय के दीर्घायु एवं समृद्धि की कामना की। इस क्षण ने विश्वविद्यालय परिवार में एकता, अपनत्व और भावनात्मक बंधन का सुंदर वातावरण रच दिया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ : कला, साहित्य और संगीत का अविस्मरणीय समन्वय।
सभागार शास्त्रीय और आधुनिक कला के संगम से मंत्रमुग्ध हो उठा—
सुखदेव प्रजापति का शास्त्रीय नृत्य–विन्यास (निर्वाद वाद्य शैली) मन को मोहित कर गया।
डॉ. प्रदीप चौरसिया, श्रीमती श्रद्धा पांडे, हरी शंकर कोरी एवं श्रीमती मोनू त्रिपाठी के एकल गीतों ने उत्सव को भावनात्मक ऊँचाइयाँ प्रदान कीं।
डॉ. सुधीर जैन की कविता ने साहित्यिक चेतना का संचार किया।
कलाकारों के प्रदर्शन ने विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक परंपरा को और अधिक प्रतिष्ठित बनाया।
उसी क्रम में AIU के 39वें इंटर यूनिवर्सिटी सेंट्रल ज़ोन यूथ फेस्टिवल 2025–26 के विजेताओं के साथ समूह–फोटोग्राफ ने विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर मिली गौरव–गाथा को पुनः स्मरण कराया।
शुभकामनाओं की श्रृंखला : नेतृत्व और आशीर्वचन का संगम
एक के बाद एक प्रतिष्ठित अतिथियों ने अपने प्रेरक विचारों से समारोह की गरिमा को बढ़ाया। अनंत कुमार सोनी, प्रो–चांसलर,
डॉ. जी.एस. पांडे, प्राचार्य, राजीव गांधी कॉलेज,
ई.आर.के. श्रीवास्तव, प्रशासक–इंजीनियरिंग
प्रो. जी.सी. मिश्रा, निदेशक–आईक्यूएसी
डॉ. हर्षवर्धन, प्रो–वाइस चांसलर (विकास) इन सभी वक्ताओं ने कुलाधिपति महोदय की दार्शनिक दृष्टि, विश्वविद्यालय परिवार के समर्पण और छात्रों की उत्कृष्ट उपलब्धियों की सराहना की।
कुलाधिपति महोदय का प्रेरणामय उद्बोधन : मार्गदर्शन और संकल्प।
माननीय कुलाधिपति श्री बी.पी. सोनी जी ने अपने उद्बोधन में विश्वविद्यालय को “परिवर्तन के पथ पर अग्रसर मानव–केंद्रित शिक्षा–संस्थान” के रूप में और अधिक सशक्त बनाने का आह्वान किया। उन्होंने छात्रों में संस्कार, अनुशासन, नवाचार–चेतना और राष्ट्र–निर्माण की प्रतिबद्धता को सर्वोच्च बताया।
उनका संदेश विश्वविद्यालय के लिए दिशा–दीपक सिद्ध हुआ।
कार्यक्रम का समापन डॉ. महेन्द्र कुमार तिवारी (डीएसडब्ल्यू) के हृदयपूर्ण आभार–प्रदर्शन से हुआ। इसके पश्चात राष्ट्रगान ने पूरे सभागार में राष्ट्रीय गौरव और एकता की ऊर्जा भर दी।
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