गारे–पेलमा सेक्टर–1 कोल ब्लॉक विवाद: धौराभाठा में उबाल, दूसरी रात भी डटे ग्रामीण—प्रशासन पर गंभीर आरोप, जनसुनवाई रद्द की मांग तेज
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रायगढ़/तमनार – जिंदल पावर की 8 दिसंबर 2025 की प्रस्तावित जनसुनवाई को लेकर तमनार अंचल के 14 गांवों में असंतोष विस्फोट की स्थिति में है। कड़कड़ाती ठंड के बीच धौराभाठा मैदान में हजारों ग्रामीण दूसरी रात भी रतजगा कर डटे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार संचालित खदानों ने विस्थापन, प्रदूषण, जलस्रोतों की तबाही जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। यदि नए खदान को मंजूरी मिली तो आसपास के 15–20 गांवों का जीवन पूरी तरह प्रभावित हो जाएगा, इसलिए जनसुनवाई का होना ही स्वीकार नहीं।
ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि जनसुनवाई की प्रक्रिया को दबाव और जल्दबाज़ी में आगे बढ़ाया जा रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि न तो प्रभावित ग्रामों को पर्याप्त जानकारी दी गई, न ही निष्पक्ष माहौल तैयार किया गया, जबकि पर्यावरण प्रभाव आंकलन भी भ्रामक है! अधिसूचना 2006 स्पष्ट रूप से यह अनिवार्य करती है कि जनसुनवाई भय, दबाव और प्रभाव से मुक्त होनी चाहिए। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की कार्यप्रणाली इस अधिसूचना की आत्मा के खिलाफ है।

उधर, सोशल मीडिया पर इस बात की भी चर्चा तेज है कि कुछ दिन पहले जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर जनसुनवाई का विरोध करने पहुंचने वाले पक्ष–विपक्ष के दिग्गज नेता अब धौराभाठा के मैदान में गायब हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जनता की लड़ाई में राजनीतिक नेतृत्व का यह गायब होना कई सवाल खड़े करता है।आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका संघर्ष केवल एक कार्यक्रम रोकने का नहीं, बल्कि अपनी जल–जंगल–जमीन और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की सुरक्षा का है। ग्रामीणों ने घोषणा की है कि “जब तक जनसुनवाई पूरी तरह रद्द नहीं होगी, हम धौराभाठा नहीं छोड़ेंगे।”
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