March 2, 2026

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एकेएस विश्वविद्यालय की डॉ. उषा शर्मा का व्याख्यान।
लखनऊ विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उन्हें मिली सराहना।

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सतना। एकेएस विश्वविद्यालय की फैकल्टी डॉ.उषा शर्मा का व्याख्यान लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रबंधन अध्ययन संकाय में संपन्न हुआ। अशोका विश्वविद्यालय के सहयोग से 28 और 29 नवंबर 2025 को आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “ह्यूमन बिहेवियर इन वर्कप्लेस एंड सोसायटी : मल्टी डिसीप्लिनरी अप्रोच टू ब्रिज थ्योरी, प्रैक्टिस एंड पॉलिसी” रहा।  ए.के.एस. विश्वविद्यालय की कंप्यूटर साइंस संकाय की शिक्षिका डॉ. उषा शर्मा ने अपने  विचारों की गूंज छोड़ दी।
सम्मेलन का मूल उद्देश्य मानव व्यवहार, कार्यस्थल की मनोवैज्ञानिक जटिलताओं, सामाजिक संरचना और नीति-निर्माण के बीच वैज्ञानिक संबंधों को समझना था। इस व्यापक मंच पर डॉ. उषा शर्मा ने “ए आई ड्रिवन इनफॉरमेशन ऑफ इंडियन नॉलेज फॉर इंडीजीनस विज़डम के परिप्रेक्ष्य में” विषय पर अपना शोध-आधारित व्याख्यान प्रस्तुत किया, जिसने उपस्थित विशेषज्ञों और प्रतिभागियों को गहराई से प्रभावित किया।अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय पारंपरिक ज्ञान प्रणाली केवल सांस्कृतिक धरोहर नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीकी युग में एक मार्गदर्शक शक्ति भी है। सूचना-चालित संसार में इंडीजीनस विज़डम की भूमिका मनुष्य और मशीन के बीच संतुलन स्थापित करने में निर्णायक हो सकती है। उन्होंने बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा में निर्णय प्राकृतिक न्याय, सामूहिक कल्याण और दीर्घदृष्टि पर आधारित होते हैं, जो आज के डेटा और ए.आई. आधारित मॉडल्स के सुधार में प्रभावी योगदान दे सकते हैं।
सभागार में उपस्थित विद्वान और शोधार्थी उनके विचारों से इतने प्रभावित हुए कि कई बार तालियों की गूंज ने वातावरण को गौरवपूर्ण बना दिया। उनके कार्य और शोध दृष्टि की खुले मंच से सराहना की गई तथा उन्हें शॉल, श्रीफल और मोमेंटो भेंट कर सम्मानित किया गया। यह क्षण ए.के.एस.विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रतिष्ठा का प्रतीक बन गया। विश्वविद्यालय के डीन डॉ. अखिलेश ए.वाऊ ने डॉ.उषा शर्मा को इस उपलब्धि पर हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि डॉ. शर्मा का शोध न केवल विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय है,बल्कि भारतीय ज्ञान प्रणाली को आधुनिक वैश्विक विमर्श में सशक्त रूप से स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान भी है।डॉ. उषा शर्मा का यह व्याख्यान इस तथ्य को और मजबूत करता है कि भारतीय पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का संगम आने वाले समय में दुनिया को नए विचार, नई दिशा और संतुलित विकास की नई संकल्पना प्रदान कर सकता है।

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