ए.के.एस. विश्वविद्यालय के डॉ. धीरज सिंह चौहान अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में की नोट स्पीकर।
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सतना। ए.के.एस. विश्वविद्यालय, सतना के रसायन शास्त्र विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. धीरज सिंह चौहान ने गवर्नमेंट श्यामा प्रसाद मुखर्जी महाविद्यालय, सीतापुर—सरगुजा (छत्तीसगढ़) में आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में कीनोट स्पीकर के रूप में अपने विवेचन से न केवल सभा को प्रभावित किया, बल्कि पर्यावरणीय संरक्षण और औद्योगिक टिकाऊपन के प्रति एक नई दृष्टि भी प्रस्तुत की।सम्मेलन के दौरान डॉ. चौहान ने “रिसेंट ट्रेंड्स इन इनवायरनमेंटली सस्टनेबल कोरोज़न इन्हिबिटर्स” विषय पर बोलते हुए कोरोज़न की वैज्ञानिक प्रकृति, उसके सामाजिक–औद्योगिक प्रभाव और उससे उपजे आर्थिक नुकसान की गंभीरता को सरल और स्पष्ट शब्दों में सामने रखा। उन्होंने यह बताया कि कोरोज़न सिर्फ धातु का क्षय नहीं, बल्कि हमारे उद्योगों, संरचनाओं और रोजमर्रा के साधनों की स्थायित्व क्षमता पर सीधा प्रहार है—जिसकी अनदेखी दूरगामी परिणाम पैदा कर सकती है।
अपने संबोधन में उन्होंने कोरोज़न प्रबंधन के वर्तमान वैज्ञानिक तरीकों, पर्यावरण-अनुकूल अवरोधकों के विकास में हो रहे वैश्विक शोध और उद्योगों में उभरती नई तकनीकों की उपयोगिता को विस्तार से रखा। उनके द्वारा प्रस्तुत शोध-प्रयोगों और विश्लेषणों ने सभा में मौजूद विशेषज्ञों, शिक्षकों और शोधार्थियों को विशेष रूप से प्रभावित किया, और उनके कार्यों की सर्वत्र सराहना हुई।
सम्मेलन के अंतिम क्षणों में आयोजन समिति ने डॉ. चौहान को स्मृति-चिह्न एवं प्रशस्ति-पत्र भेंट कर सम्मानित किया। यह क्षण न केवल उनके लिए, बल्कि ए.के.एस. विश्वविद्यालय के रसायन शास्त्र विभाग और पूरे कैंपस समुदाय के लिए गर्व से भर देने वाला रहा।
डॉ. चौहान की इस उपलब्धि पर फैकल्टी ऑफ बेसिक साइंस के डीन और रसायन शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेन्द्र यादव, विभाग के सभी प्राध्यापक, विश्वविद्यालय प्रबंधन और सहकर्मियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई दी। सभी ने इसे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रतिष्ठा में एक सशक्त जोड़ बताया, जिसने संस्थान के शोध-आधारित योगदान को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर और अधिक दृढ़ता के साथ स्थापित किया है।
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