लाखों का फंड होने के बाद भी अधर में विकास—साम्हरसिंघा में बिजली, पानी और सड़कों की जर्जर हालत!
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👉 सरपंच और पूर्व सचिव रहे निरुत्तर”
धरमजयगढ़ -ग्राम पंचायत सम्हारसिंघ का विकास पिछले कई वर्षों से मानो थम सा गया है। कभी सजीव गतिविधियों और छोटे–बड़े निर्माण कार्यों के लिए जानी जाने वाली इस पंचायत में अब सुनसान पड़ी अधूरी जरूरतों की तस्वीरें ही बची रह गई हैं। गांव की गलियों में चलते ही सबसे पहले जर्जर सड़कों की पहचान होती है, कहीं कच्ची सड़क बारिश के पानी से कटकर गड्ढों में बदल चुकी है, तो कहीं पुरानी सीसी सड़कें टूट-फूट की कहानी कहती नज़र आती हैं। बिजली व्यवस्था भी बार-बार ठप पड़ जाती है, कई मोहल्लों में लगी स्ट्रीट लाइटें महीनों से नहीं जल रहीं और शाम ढलते ही अंधेरा ग्रामीण जीवन की सामान्य समस्या बन चुका है। पानी की स्थिति भी चिंताजनक है।

इन सभी समस्याओं के बीच सबसे हैरानी की बात यह है कि पंचायत के खाते में 30 लाख रुपये से भी अधिक की राशि उपलब्ध होने के बावजूद विकास कार्य वर्षों से शुरू नहीं हो पाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जरूरतें बढ़ती गईं, परेशानियाँ गहराती चली गईं, लेकिन स्थितियाँ सुधारने की दिशा में ठोस कदम आज तक नहीं उठाया गया। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि पहले कम फंड होने के बावजूद कई जरूरी कार्य समय पर पूरे हो जाते थे, लेकिन अब राशि उपलब्ध रहने के बाद भी काम न होना समझ से परे है। कार्य आरम्भ न होने के कारण पूछे जाने पर ग्राम पंचायत सरपंच और तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव, जो अब सेवा निवृत्त हो चुके हैं, किसी भी स्पष्ट जवाब के बिना निरुत्तर हो गए। दोनों की चुप्पी ने ग्रामीणों में और अधिक सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग यह समझ नहीं पा रहे हैं कि जब फंड मौजूद है, समस्याएँ सामने हैं और ज़रूरतें बेहद गंभीर हैं, तब भी काम आखिर क्यों शुरू नहीं हो रहा है।
साम्हरसिंघा के लोग अब एक ही उम्मीद लगाए बैठे हैं कि कब गांव के बुनियादी ढांचे को सुधारा जाएगा, कब सड़कें दुरुस्त होंगी, कब पेयजल समस्या दूर होगी और कब बिजली व्यवस्था स्थाई रूप से सही होगी। वर्षों से रुका विकास अब गांव के भविष्य पर असर डाल रहा है और ग्रामीणों का धैर्य धीरे–धीरे जवाब देने लगा है।
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