धरमजयगढ़, – राजमहल प्रांगण, दशहरा मैदान 26 नवंबर की सुबह आदिवासी संस्कृति, स्वाभिमान और संवैधानिक जागरूकता के उत्सव में तब्दील हो उठा। धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा जयंती और संविधान दिवस के अवसर पर आयोजित भव्य समारोह में पारंपरिक अस्मिता और जन–जागरण की गूंज सुनाई दी , कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक लालजीत सिंह राठिया, सर्व आदिवासी समाज धरमजयगढ समाज प्रमुख, ग्राम प्रधान तथा दूरस्थ गांवों से आए प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने समारोह की गरिमा बढ़ा दी। मंच से व्यक्त विचारों में समाज के अधिकार, संस्कृति की गरिमा और एकजुटता की आवश्यकता प्रमुख रही।
इस अवसर पर बिरसा मुंडा को जल–जंगल–जमीन की रक्षा के प्रतीक संघर्षशील योद्धा के रूप में स्मरण किया गया — जिन्होंने अपने बलिदान से स्वाभिमान और स्वतंत्रता की राह प्रशस्त की। वहीं संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की पुण्य स्मृति में संविधान, समानता और सामाजिक न्याय की ऐतिहासिक धारा को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। धरमजयगढ़ में सम्पन्न यह आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि अस्मिता, अधिकार और संस्कृति के सम्मिलित जागरण का सशक्त प्रतीक बनकर इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया।