शाहपुर में जल, जंगल, जमीन ही नहीं , आस्था और अस्तित्व की भी लड़ाई !
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शाहपुर की ऐतिहासिक ग्रामसभा ने 1677.253 हेक्टेयर के प्रस्तावित एसईसीएल ओपन कोल ब्लॉक को सर्वसम्मति से खारिज करते हुए यह घोषणा की कि पाँचवीं अनुसूची और छत्तीसगढ़ पेसा अधिनियम 2022 के प्रावधानों के तहत ग्राम की सहमति के बिना किसी भी प्रकार का खनन, उद्योग, भूमि अधिग्रहण, सर्वे, विस्थापन या पर्यावरणीय जनसुनवाई पूर्णतः अवैध मानी जाएगी। धरमजयगढ़ स्थित ग्राम पंचायत शाहपुर में 23 नवंबर 2025 को आयोजित इस विशेष ग्रामसभा में ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि जंगल, जल, जमीन और प्राकृतिक संसाधनों पर अंतिम निर्णय ग्रामसभा का अधिकार है और पेसा कानून की धारा 4(क), 4(घ), 4(च) तथा 4(ज) इसका स्पष्ट समर्थन करती हैं। ग्रामसभा ने बताया कि प्रस्तावित खनन क्षेत्र घने वन क्षेत्र और हाथियों के प्राकृतिक गलियारे का हिस्सा है, जहां से होकर मांड नदी बहती है जो हाथियों एवं वन्यजीवों के लिए जीवनरेखा के रूप में महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों का कहना था कि खनन शुरू होते ही मानव-हाथी संघर्ष बढ़ेगा, पेड़ों की कटाई से पर्यावरण संतुलन बिगड़ेगा और जल स्रोत दूषित होकर खेती तथा जीवन दोनों संकट में पड़ जाएंगे, इसलिए यह परियोजना ग्राम हित और पर्यावरण हित दोनों के विरुद्ध है।
इसी दौरान ग्रामसभा में यह भी उल्लेख किया गया कि खनन क्षेत्र के समीप स्थित मां अंबेटिकरा मंदिर पर धूल और प्रदूषण का सीधा खतरा रहेगा, जो इस प्राचीन धार्मिक स्थल के अस्तित्व को प्रभावित करेगा, इसलिए इसे बचाना आवश्यक है। ग्रामीणों ने आदिवासी परंपरा और संस्कृति को भी केंद्र में रखते हुए कहा कि क्षेत्र की आराध्य देवी माँ अम्बे के अम्बेटिकरा सहित विभिन्न समाजो के कई प्राचीन देवस्थलों को किसी भी स्थिति में नुकसान नहीं होने दिया जाएगा, क्योंकि ये स्थान हमारी पहचान, हमारी आस्था और हमारी विरासत हैं। ग्राम क्षेत्र के हजारों किसान तरबूज, मक्का और धान की खेती से अच्छी आय अर्जित करते हैं और कई किसान लगभग दस लाख रुपये वार्षिक तक कमाते हैं, ऐसे में खनन के कारण भूमि बंजर होने, सिंचाई स्रोत दूषित होने और खेती उजड़ जाने से किसानों की आजीविका समाप्त हो जाएगी, इसलिए ग्रामीणों ने इसे विकास विरोध नहीं बल्कि आजीविका और अस्तित्व की सुरक्षा का मुद्दा बताया। ग्रामसभा ने प्रशासन को यह निर्देश देने की मांग भी की कि पटवारी द्वारा बिना सहमति किसानों की भूमि पर दर्ज की गई भू-अर्जन प्रविष्टियों को तुरंत हटाया जाए ताकि किसान शासकीय योजनाओं से वंचित न हों। ग्रामसभा ने अंत में यह निर्णय दर्ज किया कि शाहपुर क्षेत्र में कोयला खनन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा तथा इस संबंध में किसी भी तरह का सर्वे , जनसुनवाई, भूमि अधिग्रहण या विस्थापन मान्य नहीं होगा। ग्रामीणों ने इस ऐतिहासिक फैसले को अपनी प्राकृतिक संपदा, सांस्कृतिक विरासत और जीवन के अधिकार की रक्षा की लड़ाई बताया।
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