दुर्गापुर कोयला ब्लॉक पर उबाल: सर्वे रोकने की चेतावनी, ग्रामीणों ने कहा– पेसा कानून का खुला उल्लंघन
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धरमजयगढ़, – दुर्गापुर कोयला खनन परियोजना और कर्नाटक पावर लिमिटेड के प्रस्तावित खनन क्षेत्र में बिना ग्रामसभा अनुमति किए जा रहे सर्वे कार्यों के खिलाफ आज धरमजयगढ़, शाहपुर, बायसी, तराईमार, कॉलोनी क्षेत्र सहित छह से अधिक गांवों के सैकड़ों ग्रामीण अचानक एसडीएम कार्यालय पहुँच गए। ग्रामीणों ने नारे लगाते हुए सहायक भू-अर्जन अधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को ज्ञापन सौंपा और आरोप लगाया कि अनुसूचित क्षेत्र की ग्रामसभाओं को दरकिनार कर कंपनियों द्वारा कराए जा रहे डीजीपीएस और अन्य सर्वे प्रक्रियाएँ पूरी तरह पेसा अधिनियम की अवहेलना हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि पेसा अधिनियम ग्रामसभा को भूमि, वन, जल और प्राकृतिक संसाधनों पर पूर्ण अधिकार देता है, फिर भी कंपनियाँ ग्रामसभा से मंजूरी लिए बिना जमीन की नाप-जोख करवा रही हैं, जो न केवल असंवैधानिक है, बल्कि ग्रामसभाओं के अधिकार पर सीधा हमला भी माना जाना चाहिए।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि खनन से जुड़े उद्योग, भू-अर्जन और विस्थापन के निर्णय का अधिकार सिर्फ और सिर्फ ग्रामसभा को है, फिर भी प्रशासनिक चुप्पी इस अवैध प्रक्रिया को बढ़ावा दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावित पंचायतों की किसी भी ग्रामसभा ने खनन के पक्ष में कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया, बल्कि सर्वसम्मति से विरोध दर्ज किया गया है। इसके बावजूद कंपनियों और प्रशासन द्वारा नजरअंदाज किए गए इन विरोध प्रस्तावों को ग्रामीण संविधान और कानून की अवमानना बताते हुए इसे अवैध व असंवैधानिक कह रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी खुलासा किया कि 6 नवंबर 2025 को प्रशासन को सर्वे रोकने की मांग की गई थी, लेकिन अब तक किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिसके कारण लोगों में गुस्सा और अविश्वास गहराता जा रहा है। चेतावनी देते हुए ग्रामीणों ने कहा कि यदि बिना अनुमति चल रहे सर्वे को तुरंत नहीं रोका गया, तो किसान और ग्रामीण उग्र आंदोलन शुरू करेंगे और इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन पर होगी।
उधर कर्नाटक पावर लिमिटेड के प्रस्तावित 1610 हेक्टेयर क्षेत्र में पहले भी विरोध दर्ज हो चुका है। यह वही क्षेत्र है जिसे पहले डीबी पावर और बालको को आवंटित किया गया था, और उस दौरान हुई जनसुनवाइयों में भी किसानों ने जमीन न देने की घोषणा कर दी थी। इतना ही नहीं, किसानों ने खनन का विरोध करते हुए एन जी टी भोपाल, एन जी टी दिल्ली और हाईकोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ी थी। 24 दिसंबर 2014 को कोल स्कैम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इन कंपनियों का आवंटन रद्द कर दिया था। अब नीलामी के बाद यह क्षेत्र कर्नाटक पावर को मिला है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जिस क्षेत्र में जनता पहले ही अदालत और जनसुनवाई में विरोध जता चुकी है, वहाँ किसी भी कंपनी के लिए कोयला निकालना आसान नहीं होगा। प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने कहा कि वे अपनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे और न ही अपने क्षेत्र को विस्थापन और प्रदूषण के हवाले होने देंगे। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया— “जमीन नहीं देंगे, क्षेत्र नहीं उजड़ने देंगे।”
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