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“छाल की मिसाल: मजदूर संगठन रक्तदान को बना रहा जीवनदाता अभियान” 

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छाल तहसील में एस ई सी एल खदान में मजदूर एकता सेवा समिति केवल सामाजिक सरोकारों और मानवता की मिसाल ही नहीं गढ़ रही, बल्कि श्रमिकों के अधिकारों और सम्मानजनक कार्य-परिस्थितियों को सुनिश्चित करने में भी निर्णायक भूमिका निभा रही है। संगठन के सतत प्रयासों का परिणाम है कि छाल क्षेत्र के मजदूरों को आज वह सुविधाएँ और मजदूरी दर प्राप्त हो रही हैं, जो पहले केवल अपेक्षा मात्र थीं। 

बोधन चौहान

साल 2022 में मजदूरों की दैनिक मजदूरी लगभग 18,000 रुपये प्रतिमाह के आसपास थी, परंतु संगठन ने लगातार श्रम दरों की समीक्षा, उचित वेतनमान की मांग और उच्च स्तरीय वार्ताओं के माध्यम से HPC (High-Powered Committee) रेट दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। परिणामस्वरूप मजदूरी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जिससे सैकड़ों परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया। 

यूनियन ने केवल वेतन बढ़ाने तक ही अपनी लड़ाई सीमित नहीं रखी। मजदूरों को पूर्व में 12 घंटे तक कार्य कराने की प्रथा लंबे समय से एक बड़ी समस्या थी, जो स्वास्थ्य, सुरक्षा और मानवीय दृष्टिकोण से उचित नहीं मानी जा सकती!

। संगठन ने इस मुद्दे को मजबूती से उठाया और श्रम नियमों का पालन सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार संघर्ष किया। इस निरंतर प्रयास का नतीजा यह हुआ कि आज मजदूरों को 12 घंटे नहीं, बल्कि निर्धारित 8 घंटे ही कार्य करना पड़ता है। 

यह बदलाव संगठन की प्रभावी रणनीति, वार्ता कौशल और मजदूर हितों के प्रति अडिग प्रतिबद्धता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। मजदूरों का कहना है कि यदि संगठन ने यह पहल न की होती, तो न वेतन बढ़ता, न कार्य समय कम होता, और न ही उनकी जिंदगी में यह राहत आती। 
मजदूर एकता सेवा समिति ने एक बार फिर साबित किया है कि सही नेतृत्व और दृढ़ संकल्प से न केवल मजदूरों की आवाज बुलंद होती है, बल्कि उनके अधिकार भी सुरक्षित होते हैं। संगठन की यह उपलब्धि श्रमिक इतिहास में एक उल्लेखनीय और प्रेरणादायक अध्याय की तरह है !

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