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रांची में राष्ट्रीय खनन सम्मेलन: डीजीएमएस और सीसीएल ने बिना विस्फोट वाली खनन तकनीक पर दिया जोर

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रांची। खनन सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) और केंद्रीय कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) के संयुक्त तत्वावधान में रांची में राष्ट्रीय स्तर का “उन्नत खनन एवं नियंत्रित उत्खनन सम्मेलन” अत्यंत गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। देशभर से खनन विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, तकनीकी संस्थानों के शोधकर्ताओं तथा उद्योग प्रतिनिधियों ने इस सम्मेलन में भाग लेकर इसे ज्ञान-विमर्श का एक महत्वपूर्ण मंच बनाया।
सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य खनन क्षेत्र में सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण तथा अत्याधुनिक तकनीकी विकास को बढ़ावा देना था, ताकि भारतीय खनन उद्योग को आधुनिक और टिकाऊ दिशा में आगे बढ़ाया जा सके। विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने सुरक्षित खनन, कंपन व ध्वनि नियंत्रण, पर्यावरणीय प्रभावों को न्यूनतम करने तथा मशीन आधारित उत्खनन प्रणालियों की संभावनाओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया।
सम्मेलन में डॉ. जी. के. प्रधान को विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। उन्होंने “बिना विस्फोट वाली खनन” विषय पर अपना शोध-पत्र प्रस्तुत करते हुए कहा कि पारंपरिक ब्लास्टिंग विधियों से उत्पन्न होने वाले ध्वनि प्रदूषण, जमीन में कंपन, धूलकणों के प्रसार तथा आसपास की संरचनाओं को होने वाली संभावित क्षति के कारण आज विश्वभर में खनन प्रणालियों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि इन पर्यावरणीय चुनौतियों के चलते मशीन-आधारित खनन, नियंत्रित उत्खनन और आधुनिक कटिंग उपकरणों का उपयोग निरंतर बढ़ रहा है, जो न केवल सुरक्षित हैं बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी हैं।
सम्मेलन के दौरान विविध तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने आधुनिक निगरानी प्रणालियों, डिजिटल खनन पद्धतियों, स्वचालित मशीनों और वैज्ञानिक उत्खनन प्रक्रियाओं पर अपने महत्वपूर्ण शोध और अनुभव साझा किए। साथ ही, खनन उपकरण निर्माताओं ने नवीन तकनीक से युक्त मशीनों और सुरक्षा साधनों की प्रदर्शनी भी लगाई, जिसे प्रतिभागियों ने गहरी रुचि के साथ देखा।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को खनन उत्पादन में वैश्विक प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए पर्यावरण-सम्मत, सुरक्षित और वैज्ञानिक खनन पद्धतियों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। डीजीएमएस और सीसीएल के अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि इस प्रकार के राष्ट्रीय सम्मेलन न केवल उद्योग को नवीनतम तकनीकी प्रगति से परिचित कराते हैं, बल्कि देश को टिकाऊ और भविष्य उन्मुख खनन की दिशा में अग्रसर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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