गुरु नानक देव जी के 556वें प्रकाश पर्व पर पत्थलगांव में निकली भव्य शोभायात्रा, नगर गूंजा — “जो बोले सो निहाल… सत श्री अकाल!”
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✨ गुरु नानक देव जी के 556वें प्रकाश पर्व पर पत्थलगांव में निकली भव्य शोभायात्रा, नगर गूंजा — “जो बोले सो निहाल… सत श्री अकाल!”

पत्थलगांव।
सिख धर्म के प्रथम गुरु और मानवता, समानता एवं प्रेम के प्रवर्तक श्री गुरु नानक देव जी के 556वें प्रकाश पर्व पर मंगलवार को पत्थलगांव में अति भव्य एवं ऐतिहासिक शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा की शुरुआत स्थानीय गुरुद्वारा साहिब से पंच प्यारों की अगुवाई में हुई, जिन्होंने परंपरागत परिधान और कृपाण धारण कर आगे चलकर मर्यादा, वीरता और सिख पहचान की अखंड ज्योति को प्रदर्शित किया।

🌸 नगर के तीनों मुख्य मार्ग हुए पवित्र धुनों से आलोकित
यह शोभायात्रा जशपुर रोड, अंबिकापुर रोड तथा रायगढ़ रोड सहित नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए पुनः गुरुद्वारा साहिब में पहुंचकर संपन्न हुई। नगर के चौराहों को दुल्हन की तरह सजाया गया था। सिख समाज के पुरुष, महिलाएँ तथा बच्चे एकरूप प्रतीकात्मक परिधान में शामिल होकर शोभायात्रा की शोभा बढ़ा रहे थे।
पूरा नगर अमृत वाणी, शब्द-कीर्तन और “जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल!” के जयकारों से गूंज उठा।
🕊️ गुरु नानक देव जी — संदेश जिसने पूरी मानवता को दिशा दी
गुरु नानक देव जी ने 15वीं शताब्दी में जाति, धर्म, ऊँच-नीच के बंधनों को तोड़ते हुए मानवता को एक ही सूत्र में बाँधने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा —
“ना कोई बैरी नहीं बेगाना,
सगल संग हमको बन आई।”
अर्थात — कोई पराया नहीं है। हम सब एक ही परमात्मा की संतान हैं।
उनका सिद्धांत —
“नाम जपो, कीरत करो और वंड छको” (ईश्वर को स्मरण करो, मेहनत की कमाई खाओ और उसे दूसरों में बाँटो)
आज भी समाज के लिए सर्वश्रेष्ठ जीवन-दर्शन माना जाता है।
🎶 सात दिनों तक चले भक्ति व सांस्कृतिक आयोजन
शोभायात्रा से पूर्व 7 दिनों तक गुरुद्वारा में कीर्तन, अमृतवाणी पाठ, सेवा, खेलकूद व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए।
पूरे गुरुद्वारा को रंग-बिरंगी रोशनियों और फूलों से सजाया गया था।
सिख समाज के युवाओं, महिलाओं व बच्चों ने भक्ति और सेवा में बढ़-चढ़कर भाग लिया।
🍛 विशाल लंगर — सभी का स्वागत, बिना भेदभाव
प्रकाश पर्व पर सुबह से महाभंडारे एवं लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें नगर के सैकड़ों लोगों ने बिना भेदभाव के प्रसाद ग्रहण किया।
सिख पंथ की पहचान — जहाँ भोजन में स्वाद से अधिक सेवा की खुशबू होती है।
गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं को आत्मसात करते हुए गरीब, असहाय और राहगीरों को भी नाश्ता व चाय-जलपान कराकर “सर्वधर्म समभाव” की मिसाल पेश की गई।

🙏 समाजों ने बढ़कर किया स्वागत
शोभायात्रा का अग्रवाल समाज, ब्राह्मण समाज, भोजपुरी समाज, सिंधी समाज,सहित अनेक सामाजिक संगठनों ने चौक-चौराहों पर जलपान, फलाहार और स्वागत-दीप से अभूतपूर्व स्वागत किया।
यह दृश्य आपसी भाईचारे, सौहार्द और सांस्कृतिक एकता का जीवंत प्रतीक था।

💥 रात में नगर चौक पर भव्य आतिशबाज़ी
शाम को नगर चौक में विशेष आतिशबाज़ी कार्यक्रम का आयोजन रखा गया है, जिसमें युवाओं की टीम ने खास तैयारियाँ की हैं।
चमकते आकाश में रंग-बिरंगे प्रकाश-फूल प्रकाश पर्व की आध्यात्मिक खुशियों का संदेश देंगे।

👏 आयोजन को सफल बनाने में प्रमुख का नेतृत्व
प्रकाश पर्व को भव्यता प्रदान करने में गुरु सिंह सभा पत्थलगांव के पदाधिकारी और सेवादारों का विशिष्ट योगदान रहा —
अध्यक्ष: हरजीत सिंह भाटिया
उपाध्यक्ष: गुरूशरण सिंह भाटिया
सचिव: कुलविंदर सिंह भाटिया
कोषाध्यक्ष: सिंदर सिंह भाटिया
साथ ही —
गुरूदयाल सिंह भाटिया, कुलवंत सिंह भाटिया, अमरजीत सिंह भाटिया (काक्के), मनजीत सिंह भाटिया, बिल्लु भाटिया, रविन्द्र भाटिया, सरनजीत सिंह भाटिया, परमजीत सिंह भाटिया, सतविंदर सिंह भाटिया, सन्नी भाटिया, शैंकी मेहरा, सोनल भाटिया, अमन भाटिया, राजा भाटिया व अन्य सेवादारों ने आयोजन को सफलतम रूप दिया।

युवा सेवादल:
रणवीर सिंह भाटिया,अवजोत सिंह भाटिया, तनजोत सिंह भाटिया, मनजोत सिंह भाटिया, करमन सिंह भाटिया,गगनजोत पटेल , विनय शर्मा,राजू शर्मा,अंश सिंह ,राकेश फोटवानी व J.J. मेडिकल टीम ने नाश्ते, चाय-पानी और सेवा में योगदान देकर गुरु सेवा का श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत किया।

🚓 पुलिस प्रशासन की सराहनीय भूमिका
कार्यक्रम और शहर की यातायात व्यवस्था को सुरक्षित, शांतिपूर्ण और सुचारू बनाए रखने में
पत्थलगांव एसडीओपी श्री धुर्वेश जायसवाल
तथा
थाना प्रभारी श्री विनीत पांडे
का विशेष योगदान रहा।
पूरे कार्यक्रम के दौरान पुलिस टीम द्वारा मार्ग-नियमन, सुरक्षा घेरा, भीड़ नियंत्रण और यातायात व्यवस्था अत्यंत अनुशासित और संवेदनशील रूप से संचालित की गई।
सिख समाज तथा नगरवासी पुलिस प्रशासन के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं।
“सेवा केवल गुरुद्वारा में नहीं — सुरक्षा व्यवस्था में भी दिखी।”
🌼 निष्कर्ष
यह प्रकाश पर्व केवल धार्मिक उत्सव नहीं —
यह मानवता, सेवा, समानता और प्रेम की जीवित घोषणा है।
पत्थलगांव ने आज फिर सिद्ध किया —
जहाँ प्रेम और भाईचारे का प्रकाश हो, वहाँ नगर स्वयं गुरुद्वारा बन जाता है।
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