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पत्थलगांव में मोमोज बना ‘मौतोज’ — धागे वाला स्वाद, सरकार का साइलेंट ट्रीटमेंट!

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पत्थलगांव, जिला जशपुर | 03 नवंबर 2025।
पत्थलगांव की गलियों में आजकल एक नया स्वाद फैला है — “प्लास्टिक बोरे वाला मोमो!”
नाम सुनकर ही मुंह में पानी नहीं, बल्कि डर उतर आता है।
बाहर से आए कुछ “मोमोज मिस्त्री” (जो दिखने में मोमोज एक्सपर्ट हैं लेकिन असल में “धागा उद्योग” के अग्रणी सदस्य लगते हैं 😅) अब यहां खुलेआम बच्चों के पेट में प्लास्टिक पहुंचाने का ठेका लिए बैठे हैं।


🍽️ मोमो में निकला धागा — स्वाद का नया थ्रेड एडिशन!

हाल ही में एक व्यक्ति ने अपने बच्चों के लिए गरमा-गरम मोमो खरीदे।
बच्चे ने जैसे ही एक कौर लिया — मुंह से बोरे का धागा निकल आया!
अब बच्चा बोला — “पापा! ये मोमो है या सिलाई मशीन?”

जब पिता साहब उस सेंटर पर शिकायत लेकर पहुंचे, तो दुकानदार ने अपने चेहरे पर ताजगी लाकर जवाब दिया —

“मुझे नहीं पता धागा कैसे निकला!”

वाह साहब!
ऐसा जवाब तो सरकार के प्रेस नोट में भी नहीं मिलता —

“मामले की जांच की जाएगी।” 😏


🧑‍⚕️ फूड इंस्पेक्टर का ध्यान शायद डाइट चार्ट पर है!

अब मज़े की बात सुनिए —
फूड इंस्पेक्टर को सूचना दी गई, पर वे शायद मोमोज के साथ “नींबू-पानी” पीकर सो गए।
ना निरीक्षण, ना नोटिस, ना कोई एक्शन — बस प्रशासन का क्लासिक फॉर्मूला —

“मामला संज्ञान में है, जांच की जाएगी…”

अरे भई!
जांच तब होगी जब लोग अस्पताल पहुंचेंगे या तब जब मोमो बेचने वाला “मेडिकल स्टॉल” खोल लेगा? 🤨


⚖️ कानून कहता है – लेकिन अधिकारी सुनते नहीं!

खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 साफ कहता है कि —

“कोई भी व्यक्ति ऐसा खाद्य पदार्थ नहीं बेचेगा जो मानव उपभोग के लिए हानिकारक हो।”

पर पत्थलगांव में तो लगता है “धारा 26(2)(ii)” का मतलब कुछ और ही बना लिया गया है —

“जो चाहे, जहां चाहे, जैसे चाहे बेचो — अधिकारी केवल फाइल देखेंगे!” 😜


🧑‍⚖️ प्रशासन से जनता की फरियाद (थोड़ी नाराज़गी के साथ)

  • भाई! इन फास्ट फूड वालों के लाइसेंस की जांच तो कीजिए!
  • जो बिना FSSAI लाइसेंस के बेच रहे हैं, उन पर कार्रवाई कीजिए!
  • बच्चों की तबीयत बिगड़ने से पहले थोड़ा अपना ड्यूटी मोड ऑन कर लीजिए!

क्योंकि अब जनता पूछने लगी है —

“क्या प्रशासन ने मोमोज वालों से भी कोई ‘मासिक सदस्यता योजना’ ले रखी है?” 😏


🗣️ जनता की जुबान से

“मोमो खाकर अब स्वाद नहीं, डर लगता है।”
“सरकार शायद चाहती है कि हम खाने से पहले लैब टेस्ट कराएं।”
“अगर यही चलता रहा तो अगला कदम — मोमो में ‘ब्लूटूथ’ निकलना बाकी है!”


📰 पत्रकारिता का व्यंग्यात्मक निष्कर्ष

पत्थलगांव में अब वक्त आ गया है कि प्रशासन मोमोज का नहीं, अपने रवैये का टेस्ट कराए।
स्वाद की जगह अगर सिस्टम की सुस्ती मिले, तो जनता भी अब थाली नीचे रख देगी।

⚠️ “खाने में धागा, शासन में सुस्ती — दोनों मिलकर देश की सेहत खराब कर रहे हैं।”


🏛️ कलेक्टर साहब के नाम छोटा-सा संदेश —

माननीय कलेक्टर महोदय,
पत्थलगांव में “धागा-युक्त मोमो” सिर्फ फूड क्वालिटी का नहीं, बल्कि प्रशासनिक गुणवत्ता का भी टेस्ट बन चुका है।
जनता अब जांच की नहीं, कार्यवाही की खुशबू चाहती है।
कृपया इस मुद्दे को फाइल की नींद से उठाकर,
जमीनी स्तर पर ऐसी कार्रवाई करें कि अगली बार धागा नहीं, कानून की डोर चले।

💬 “मोमो ठंडे पड़ जाएं चलेगा, पर प्रशासन गर्म होना चाहिए।” 😎


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