ऑनलाइन भुगतान प्रणाली पर उठे सवाल: संदेहास्पद बिलों ने व्यवस्था की खोली पोल !
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धरमजयगढ़ – जनपद पंचायत के कई ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्यों और सामग्री आपूर्ति से जुड़े कई ऐसे भुगतान सामने आ रहे हैं, जिन्होंने पीएफएमएस प्रणाली की पारदर्शिता, प्रामाणिकता और मॉनिटरिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फर्जी या संदिग्ध बिल,अधूरे दस्तावेज इन सभी ने न केवल ऑनलाइन भुगतान की वित्तीय प्रणाली की विश्वसनीयता पर आंच पहुंचाई है, बल्कि सरकारी पैसों के उपयोग को लेकर भी संदेह गहरा दिया है।
ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, अनेक मामलों में कहीं कोरे या अपूर्ण बिलों के आधार पर लाखों रुपये का भुगतान,कहीं साधारण बिल (बिना जीएसटी ) पर बालू-गिट्टी, मुरुम और अन्य निर्माण सामग्री की आपूर्ति दर्शा दी गई,तो कहीं डस्टबिन की खरीदी दिखाकर भुगतान कंप्यूटर एसेसरीज़ का बिल का दिखाया गया है, कहीं कम कार्य के बदले अधिक भुगतान और अधिक बिल के बदले कम भुगतान,ऐसे मामले सामने आए हैं जो प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रक्रिया पर ही प्रश्नचिन्ह लगाते हैं।




सबसे गंभीर स्थिति मजदूरी भुगतान और सामग्री खरीददारी के बिल में नजर आ रही है, जहाँ मस्टर रोल न तो पूर्ण थे, न हस्ताक्षरित और न ही कार्य का स्पष्ट विवरण दर्ज था। इसके बावजूद भुगतान स्वीकृत हो गया, जो सवाल खड़ा करता है कि भुगतान से पूर्व दस्तावेज़ों का वास्तविक निरीक्षण हुआ भी या नहीं।यह स्थिति तीन संभावनाओं की ओर इशारा करती है सिस्टम मॉनिटरिंग की कमी,तकनीकी खामी,या फिर संभावित सांठ-गांठ और संगठित गड़बड़ी की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता, इसके अलावा कार्य स्थल पर कार्य होने की बात भी सवालों के घेरे में है !
यदि समय रहते ऐसी प्रक्रियाओं की व्यवस्थित जांच, थर्ड-पार्टी वेरिफिकेशन और भुगतान प्रणाली की सतत निगरानी लागू नहीं की गई, तो भविष्य में सरकारी धन के बड़े घोटालों के उजागर होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
💥 उच्चधिकारीयों से होगी शिकायत – इन संदेहास्पद भुगतान प्रक्रिया एवं दस्तावेजों के आधार पर जागरूक नागरिक उच्चधिकारीयों से शिकायत की तैयारी में है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऑनलाइन भुगतान प्रणाली पारदर्शिता के मूल उद्देश्य पर खरी उतर सके और सरकार के पैसे का दुरुपयोग रोका जा सके।

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