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धरमजयगढ़ जनपद में नीलामी पर न्यायालय की रोक  !  नियम विरुद्ध नीलामी का लगा आरोप

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जनपद पंचायत कार्यालय धरमजयगढ़

धरमजयगढ़ – जनपद पंचायत धरमजयगढ़ द्वारा शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में निर्मित पांच नई दुकानों की नीलामी प्रक्रिया अब न्यायालय की निगरानी में आ गई है। अपर कलेक्टर रायगढ़ न्यायालय ने इस नीलामी पर अंतरिम स्थगन आदेश जारी करते हुए प्रक्रिया की वैधानिकता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जनपद पंचायत धरमजयगढ़ ने हाल ही में पांच दुकानों की नीलामी के लिए 22 शर्तों सहित सीमित निविदा सूचना प्रकाशित की थी।
यह नीलामी 24 अक्टूबर 2025, शुक्रवार को दोपहर 12 बजे जनपद पंचायत सभा कक्ष में खुली बोली प्रणाली से प्रस्तावित थी।

इन्हीं शर्तों को लेकर दोमन सिदार, आ. भूपदेव सिदार (निवासी चिर्रामुड़ा, थाना तमनार) ने कुछ प्रावधानों को विधि-विरुद्ध और भेदभावपूर्ण बताते हुए अपर कलेक्टर रायगढ़ न्यायालय में चुनौती दी थी !

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राजीव कालिया ने यह तर्क रखा कि नीलामी की शर्तें अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के लोगों के लिए प्रतिकूल हैं और इनसे स्थानीय आदिवासी वर्ग को नीलामी से बाहर रखने की मंशा झलकती है।
अभिलेखों का अवलोकन और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपर कलेक्टर रायगढ़ न्यायालय ने दुकानों की नीलामी की अग्रिम कार्यवाही पर अंतरिम स्थगन आदेश पारित किया है।

🔹 न्यायालय की रोक से प्रशासनिक हलकों में हलचल

इस आदेश के बाद जनपद पंचायत धरमजयगढ़ की नीलामी प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा का विषय बन गया है कि क्या प्रशासन ने अनुसूचित क्षेत्र के संवैधानिक प्रावधानों — विशेष रूप से PESA अधिनियम का पालन किया था या नहीं।

गौरतलब है कि धरमजयगढ़ पंचायत (अनुसूचित क्षेत्र विस्तार) अधिनियम – PESA 1996 के तहत आता है,
जहाँ नीलामी, ठेका, पट्टा अथवा दुकान आवंटन जैसी प्रक्रियाएँ ग्रामसभा की अनुशंसा से की जानी चाहिए।
परंतु इस प्रकरण में ऐसा प्रतीत होता है कि ग्रामसभा की भूमिका को दरकिनार कर सीधे प्रशासनिक प्रक्रिया अपनाई गई।

🔹 स्थगन आदेश के बाद नीलामी अनिश्चितकाल के लिए टली

न्यायालय के अंतरिम आदेश के चलते अब यह नीलामी प्रक्रिया अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गई है।
आगामी सुनवाई में यह तय होगा कि क्या जनपद पंचायत की नीलामी प्रक्रिया कानूनी रूप से वैध थी?
और क्या नीलामी की शर्तें अनुसूचित क्षेत्र के संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप थीं या नहीं?
इस पूरे घटनाक्रम ने जनपद पंचायत धरमजयगढ़ की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन जनहित और संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी करेगा,
तो यह शासन की पारदर्शिता और न्यायिक प्रक्रिया दोनों के लिए चुनौती बन सकता है।
धरमजयगढ़ की यह नीलामी सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि स्थानीय स्वशासन बनाम प्रशासनिक नियंत्रण का प्रतीक बन गई है।
न्यायालय के हस्तक्षेप ने यह संदेश दिया है कि लोकल बॉडीज को संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करना ही होगा।
अब सभी की निगाहें आने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि यह नीलामी वैधानिक थी या मनमानी।

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