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चंदन वाड़ा खुर्द विजयदशमी विशेष: नौ दिन की भक्ति, भंडारे की प्रसादी और बुराई पर अच्छाई की जीत

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चंदन वाड़ा खुर्द: आज, दशहरा के पावन पर्व पर, पूरा देश धर्म की अधर्म पर और सत्य की असत्य पर विजय का उत्सव मना रहा है। यह पर्व माँ दुर्गा के नौ दिनों की कठोर उपासना के समापन और भगवान श्री राम द्वारा लंकापति रावण के वध का प्रतीक है।
माता रानी के नौ दिवस की अलौकिक यात्रा
दशहरे से पहले, शारदीय नवरात्रि के नौ दिन तक, वातावरण पूर्ण रूप से भक्तिमय रहा। श्रद्धालुओं ने आदि शक्ति माँ दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों – शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मंदिरों में सुबह और शाम की आरती, भजन-कीर्तन, और दुर्गा सप्तशती के पाठ गूंजते रहे। भक्तों ने इन नौ दिनों में उपवास रखकर माता रानी से सुख-समृद्धि और शक्ति का आशीर्वाद मांगा। मंदिरों और घरों में कलश स्थापना की गई और छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर कंजका पूजन किया गया।
भव्य भंडारे में उमड़ा आस्था का सैलाब
नवरात्रि के समापन और विजयदशमी के उपलक्ष्य में, शहर के विभिन्न मंदिरों और स्थानों पर विशाल भंडारों का आयोजन किया गया। इन भंडारों में हजारों श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक प्रसादी ग्रहण की। हलवा-पूरी, सब्जी और चने की प्रसादी वितरण का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो गया, जो देर शाम तक जारी रहा। सेवादारों ने उत्साह के साथ भक्तों को भोजन कराया, जिससे हर तरफ एक अद्भुत सामूहिकता और भक्ति का माहौल बन गया। ऐसा मानना है कि भंडारे में सेवा और प्रसाद ग्रहण करने से माता रानी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
रावण दहन: बुराई पर अच्छाई की विजय का संकल्प
विजयदशमी के इस मुख्य दिन, शाम को रावण, मेघनाद और कुंभकरण के विशाल पुतलों का दहन किया गया। [यदि संभव हो तो यहां उस स्थान का नाम जोड़ें जहां दहन हुआ] में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में हज़ारों की संख्या में लोग एकत्र हुए। भगवान श्री राम की जय-जयकार के बीच जैसे ही अग्नि बाण से अहंकार के प्रतीक रावण का पुतला जला, आसमान आतिशबाजी से भर गया। यह दहन हमें यह प्रेरणा देता है कि हमें भी अपने अंदर के क्रोध, लोभ, अहंकार और अन्य बुराइयों का नाश कर, धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए।
दशहरा का यह पर्व, हमारी संस्कृति की समृद्धि और धार्मिक आस्था को दर्शाता है, जो हमें हमेशा सत्य और न्याय के पक्ष में खड़े रहने का संदेश देता है।

समिति की सदस्यों ने अपनी दूरदर्शिता और सहयोग से एक सफल मार्ग तैयार किया है।अनुभवी और समर्पित सदस्यों की यह समिति अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। यहां पड़ा बाबा संतकुमार ठाकुर जिन्होंने पूर्ण समर्पण भाव से नौ दिनों तक माता रानी की सेवा की उनका भी धन्यवाद।

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