March 2, 2026

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मांड नदी पर खनन माफियाओं का कब्ज़ा! धरमजयगढ़ में थाने के सामने से रोज़ 50-60 ट्रैक्टर रेत ले जाते, पुलिस ने फोन तक उठाना बंद किया

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सरपंच बोले – बार-बार मना करने पर भी खनन माफिया नहीं रुकते; नाबालिग ड्राइवर, बिना नंबर ट्रैक्टर और रोज़ाना लाखों का काला कारोबार; पत्रकार की सूचना पर भी पुलिस मौन, एसडीएम ने कार्रवाई का दिया आश्वासन।


📍 घटनास्थल और पृष्ठभूमि

रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ ब्लॉक के ससकोबा गनपतपुर गांव के पास बह रही मांड नदी इस वक्त अवैध बालू खनन का बड़ा गढ़ बन चुकी है। यहाँ पिछले कई वर्षों से लगातार खनन माफिया सक्रिय हैं और अब यह मामला संगठित अपराध का रूप ले चुका है।


🚜 खुलेआम धंधा – रोज़ाना 50-60 ट्रैक्टर

हमारे संवाददाता नारायण प्रधान की पड़ताल में सामने आया कि दिन-रात दर्जनों ट्रैक्टर रेत भरकर निकलते हैं। अनुमान है कि रोजाना करीब 50 से 60 ट्रैक्टर गाड़ियाँ नदी से रेत निकालती हैं।
मजदूरों से प्रति ट्रैक्टर ₹1000 वसूला जाता है और वही रेत बाजार में पहुँचकर ₹3000 से ₹3500 तक बेची जाती है। यानी लाखों का काला कारोबार प्रशासन की नाक के नीचे धड़ल्ले से चल रहा है।


⚠️ नाबालिग ड्राइवर और बिना नंबर प्लेट ट्रैक्टर

जाँच में यह भी सामने आया कि यहाँ चल रहे अधिकतर ट्रैक्टरों पर कोई नंबर प्लेट नहीं लगी है, यानी उनका रजिस्ट्रेशन ही संदिग्ध है। कई ट्रैक्टरों को नाबालिग ड्राइवर चला रहे हैं, जो कानून की सीधी धज्जियां उड़ाने जैसा है। यह सब स्पष्ट करता है कि माफिया कितने निडर और बेखौफ हो चुके हैं।


🗣️ सरपंच का बयान

इस मामले पर जब गाँव के सरपंच से बातचीत की गई तो उन्होंने माना कि –
“खनन का यह काम कई वर्षों से चल रहा है। हम तो नए सरपंच हैं, हमने बार-बार मना किया, लेकिन खनन करने वाले लोग मानते ही नहीं।”


🚨 पुलिस की संदिग्ध चुप्पी

सबसे गंभीर सवाल पुलिस की भूमिका पर उठता है।
जब संवाददाता ने बाकारूमा थाना को सूचना दी तो पुलिस ने पहले टालमटोल किया और फिर फोन उठाना ही बंद कर दिया।
यहाँ तक कि जब पत्रकार ने कहा कि “मैं मौके पर जा रहा हूँ, मुझे खतरा हो सकता है, आप मदद कीजिए” — तब भी पुलिस मौन रही।
यह आचरण कहीं न कहीं यह दर्शाता है कि खनन माफियाओं को पुलिस का संरक्षण प्राप्त है।


🏛️ एसडीएम का आश्वासन

जब पुलिस ने मदद नहीं की तो संवाददाता ने सीधे धरमजयगढ़ एसडीएम से संपर्क किया।
एसडीएम ने इस मामले को गंभीरता से लेने और कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। अब देखने वाली बात होगी कि यह आश्वासन सिर्फ कागज़ पर रहेगा या वास्तव में कार्रवाई भी होगी।


👷 मजदूरों की फौज

इस खनन धंधे में 8 से 10 मजदूरों के ग्रुप सक्रिय हैं, जिनमें से हर ग्रुप में करीब 10-10 मजदूर लगातार काम करते हैं। ये मजदूर रोजाना माफियाओं को लाखों रुपये का मुनाफा कमा कर देते हैं।


❓ बड़ा सवाल – क्या टूटेगी शासन-प्रशासन की नींद?

👉 एक तरफ सरकार पर्यावरण बचाने और अवैध खनन पर रोक लगाने की बातें करती है,
👉 वहीं दूसरी तरफ धरमजयगढ़ में मांड नदी का सीना छलनी हो रहा है।

अब बड़ा सवाल यही है कि —

  • क्या इस खबर के बाद शासन-प्रशासन हरकत में आएगा?
  • क्या थाने की भूमिका की जाँच होगी?
  • या फिर हमेशा की तरह यह मामला भी दबा दिया जाएगा?

🛑 निष्कर्ष

फिलहाल, मांड नदी से बह रही है सिर्फ़ रेत ही नहीं, बल्कि जनता का प्रशासन और कानून पर भरोसा भी।
इस अवैध खनन पर रोक लगाना अब प्रशासन की पहली और सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन चुकी है।



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