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March 3, 2026

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आरएचओ हनुमंत पैकरा पर सवाल – घर में चला रहे प्राइवेट क्लीनिक, अब कार्रवाई की मांग तेज

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लैलूंगा/बगुडेगा।
लैलूंगा ब्लॉक के आरएचओ (Rural Health Officer) हनुमंत पैकरा पर गंभीर आरोप लगे हैं कि वे अपने घर पर ही प्राइवेट क्लीनिक संचालित कर रहे हैं। वहां पर न केवल दवाइयों का अवैध वितरण किया जा रहा है, बल्कि मरीजों को विभिन्न प्रकार की मेडिकल सेवाएं भी दी जा रही हैं। यह मामला सामने आने के बाद पूरे इलाके में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

📌 सूचना बीएमओ और अधिकारियों तक पहुँची

इस घटना की जानकारी ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) लैलूंगा समेत संबंधित अधिकारियों को व्हाट्सएप के माध्यम से दे दी गई है। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस पर किस स्तर की कार्रवाई करता है।


⚖️ आरएचओ के कार्य-अधिकार

आरएचओ का पद केवल ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन, टीकाकरण, मातृ-शिशु देखभाल और आपातकालीन चिकित्सा सहयोग तक सीमित है।

  • आरएचओ को निजी प्रैक्टिस या क्लीनिक संचालन का कोई अधिकार नहीं है।
  • यह पद चिकित्सकीय विशेषज्ञ (Specialist Doctor) का नहीं होता, बल्कि केवल स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन व प्राथमिक उपचार तक ही सीमित है।

🚫 कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन

  1. क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट, 2010
    • बिना पंजीकरण (Registration) किसी भी प्रकार का क्लीनिक या नर्सिंग होम चलाना दंडनीय अपराध है।
    • दोषी पाए जाने पर जुर्माना और संस्थान सील करने का प्रावधान है।
  2. भारतीय दंड संहिता / BNS (Bharatiya Nyaya Sanhita)
    • धोखाधड़ी व छल (धारा 417, 420 BNS) : यदि मरीजों से आर्थिक लाभ उठाया गया।
    • लापरवाही से जान को खतरे में डालना (धारा 336, 337, 338 BNS) : यदि गलत इलाज से मरीज की जान को जोखिम हुआ।
  3. इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट व MCI की आचार संहिता
    • एक MBBS डॉक्टर भी बिना अनुमति 3 घंटे से अधिक निजी प्रैक्टिस नहीं कर सकता।
    • आरएचओ का तो इस स्तर की प्रैक्टिस करने का कोई वैधानिक अधिकार ही नहीं है।

जनता के सवाल

  • जब आरएचओ ही घर पर क्लीनिक खोलेंगे तो आम जनता को कैसा संदेश मिलेगा?
  • क्या स्वास्थ्य विभाग इस मामले में निलंबन, विभागीय जांच व कानूनी कार्रवाई करेगा?
  • क्या ऐसे मामलों में मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ नहीं हो रहा है?

📢 अब जिम्मेदारी किसकी?

👉 इस पूरे मामले पर जिला कलेक्टर, सीएमएचओ (Chief Medical & Health Officer) और स्वास्थ्य मंत्री को तत्काल संज्ञान लेना चाहिए।
👉 जनता यह जानना चाहती है कि क्या ऐसे मामलों में सिर्फ लीपापोती होगी या फिर वास्तव में कड़ी कार्रवाई भी होगी?
👉 क्या विभाग आरोपी आरएचओ को निलंबित कर कानूनी कार्यवाही करेगा या फिर मामले को दबाने की कोशिश की जाएगी?


🖊️ उद्घोष समय न्यूज़
स्टेट हेड छत्तीसगढ़ – प्रेम सिंह राजपूत


यहाँ RHO (Rural Health Officer) के प्रमुख कार्यों की संक्षिप्त सूची, और फिर एक बिंदु का पूरा, चरण-दर-चरण विस्तृत विवरण दिया जा रहा है:


RHO के प्रमुख कार्य (संक्षेप में)

  • OPD/प्राथमिक उपचार व आवश्यक रेफ़रल समन्वय
  • टीकाकरण कार्यक्रम व कोल्ड-चेन प्रबंधन
  • मातृ-शिशु स्वास्थ्य (ANC/PNC), पोषण और उच्च-जोखिम ट्रैकिंग
  • संक्रामक रोग सर्विलांस (IDSP), आउटब्रेक रिस्पॉन्स
  • दवा/उपकरण/स्टॉक रजिस्टर व HMIS-RCH रिपोर्टिंग
  • ASHA-ANM-AWW समन्वय, माइक्रोप्लानिंग और आउटरीच सत्र
  • स्वास्थ्य शिक्षा/IEC-BCC व समुदाय सहभागिता
  • बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन व गुणवत्ता आश्वासन/सुपरविज़न

एक बिंदु का विस्तृत विवरण: टीकाकरण कार्यक्रम और कोल्ड-चेन प्रबंधन

1) उद्देश्य

  • जन्म से 16 वर्ष तक के बच्चों व गर्भवती महिलाओं का सम्पूर्ण टीकाकरण कवरेज ≥ 90% रखना, ड्रॉप-आउट < 10%।
  • वैक्सीन की क्वालिटी (2–8°C) और सुरक्षा सुनिश्चित करना, ताकि प्रभाव बना रहे।

2) माइक्रोप्लानिंग व लाभार्थी तैयारी

  • वार्ड/गाँव-वार ड्यू-लिस्ट (RCH/HMIS/रजिस्टर) बनवाना; नए-जन्म/माइग्रेशन अपडेट।
  • सत्र-स्थल (सब-सेंटर/आंगनवाड़ी/स्कूल/आउटरीच) तय करना; दिन, समय, टीम (ANM, ASHA, AWW) फाइनल।
  • हार्ड-टू-रीच इलाकों के लिए विशेष कैंप/मोबाइल सत्र।
  • अभिभावकों को संदेश/घोषणा—ASHA के जरिए रिमाइंडर।

3) कोल्ड-चेन: वैक्सीन की सुरक्षा

  • ILR/Deep Freezer में वैक्सीन 2–8°C; फ्रीज़र सिर्फ आइस-पैक के लिए।
  • टेम्प लॉग: दिन में कम से कम 2 बार रीडिंग दर्ज; पावर-कट पर वैकल्पिक व्यवस्था (इन्वर्टर/जनरेटर/कोल्ड-बॉक्स)।
  • VVM (Vaccine Vial Monitor) जाँचना; Stage-3/4 वैक्सीन न प्रयोग करें।
  • FEFO (First-Expiry-First-Out): एक्सपायरी-नज़दीक वैक्सीन पहले इस्तेमाल।
  • परिवहन के लिए कोल्ड-बॉक्स/वैक्यूम फ्लास्क में कंडीशन्ड आइस-पैक।

4) सत्र-पूर्व, सत्र-दौरान, सत्र-उपरांत चेकलिस्ट

  • पूर्व: वैक्सीन/सिरिंज/सेफ्टी-बॉक्स/कॉटन/अन्य लॉजिस्टिक; AEFI किट तैयार।
  • दौरान: सही डोज/रूट/साइट; बर्थ-डोज/ड्यू-डोज; लाइन-लिस्ट अपडेट; सेफ्टी-इंजेक्शन।
  • उपरांत: टैलीशीट, वैक्सीन-वेस्टेज कैलकुलेशन, शार्प निपटान (BMW नियम), स्टॉक-रिटर्न।

5) AEFI (Adverse Event Following Immunization) प्रबंधन

  • तुरंत प्राथमिक उपचार, आवश्यक हो तो रेफ़रल/एंबुलेंस।
  • AEFI रिपोर्टिंग फॉर्म भरकर समयसीमा में ब्लॉक/ज़िला AEFI कमेटी को भेजना; फॉलो-अप और कम्युनिटी काउंसलिंग।

6) रिकॉर्डिंग, रिपोर्टिंग, विश्लेषण

  • HMIS/RCH में सत्र-वार एंट्री; कवरेज, ड्रॉप-आउट (जैसे DPT1→DPT3) मॉनिटरिंग।
  • कवरेज गैप वाले गाँवों की पहचान; विशेष सत्र/हर घर दस्तक-टाइप ड्राइव।
  • मासिक मीटिंग में केपीआई: कवरेज %, ड्रॉप-आउट %, वेस्टेज %, AEFI रिस्पॉन्स-टाइम, कोल्ड-चेन ब्रेकज़।

7) समुदाय व संचार (IEC-BCC)

  • मिथकों का खंडन (बुखार/बांझपन/दुष्प्रभाव की अफ़वाह) के लिए टार्गेटेड संदेश
  • स्कूल/पंचायत/धर्म-नेताओं से सहयोग; मदर-मीटिंगहोम-विज़िट

8) गुणवत्ता आश्वासन व सुपरविज़न

  • ANM/ASHA को ऑन-जॉब डेमो-काउंसलिंग, इंजेक्शन-सेफ्टी और AEFI ड्रिल।
  • बायोमेडिकल वेस्ट का सुरक्षित निपटान; ऑडिट/स्पॉट-चेक।

9) जोखिम व समाधान

  • पावर-फेलियर: आइस-पैक/कोल्ड-बॉक्स तैयार; ILR का दरवाज़ा अनावश्यक न खोलें; तापमान विचलन पर वैक्सीन क्वारंटीन/टैग।
  • डिजिटल डाउनटाइम: पेपर-रजिस्टर बैकअप।
  • वेस्टेज: सत्र आकार और मल्टी-डोज स्ट्रैटेजी से नियंत्रित।

10) Do’s & Don’ts (सीमाएँ)

  • RHO घर/प्राइवेट स्थान पर वैक्सीन/इलाज/दवा वितरण नहीं कर सकता।
  • कोई शुल्क नहीं; सरकारी प्रोटोकॉल से बाहर दवा/डोज/प्रोसीजर नहीं।
  • सभी वैक्सीन/रजिस्टर सरकारी संपत्ति—नियमित ऑडिट योग्य।


🏥 सरकारी डॉक्टर घर पर क्लीनिक कब चला सकते हैं?

1. मूल नियम (Fundamental Rule)

  • भारत सरकार और राज्य सरकारों की सर्विस रूल्स (जैसे – CGHS, CG Civil Services Rules, All India Service Rules) के अनुसार, सरकारी डॉक्टर पूर्णकालिक कर्मचारी (Full Time Government Servant) होते हैं।
  • उन्हें अपनी ड्यूटी और सरकारी सेवा ही प्राथमिक रूप से निभानी होती है
  • इस कारण बिना अनुमति प्राइवेट प्रैक्टिस करना प्रतिबंधित (Prohibited) है।

2. किन परिस्थितियों में अनुमति मिल सकती है?

🔹 (a) राज्य सरकार द्वारा “Non-Practicing Allowance (NPA)”

  • ज्यादातर राज्यों में सरकारी डॉक्टरों को NPA (Non Practicing Allowance) दिया जाता है।
  • NPA का मतलब है कि डॉक्टर निजी प्रैक्टिस नहीं कर सकते, और इसके बदले उन्हें अतिरिक्त वेतन मिलता है।
  • अगर NPA मिल रहा है → घर पर क्लीनिक चलाना पूरी तरह गैर-कानूनी।

🔹 (b) सरकार से विशेष अनुमति (Permission from Competent Authority)

कुछ राज्यों/परिस्थितियों में सरकार “Private Practice” की लिखित अनुमति दे सकती है।
इसकी शर्तें आमतौर पर:

  1. डॉक्टर नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस (NPA) छोड़ देगा
  2. प्रैक्टिस केवल निश्चित समय (ड्यूटी के बाद) होगी।
  3. प्रैक्टिस का समय आम तौर पर अधिकतम 2–3 घंटे प्रतिदिन होता है।
  4. क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट, 2010 के तहत क्लीनिक का पंजीकरण जरूरी है।
  5. डॉक्टर सरकारी दवाइयाँ/सुविधाएँ इस्तेमाल नहीं कर सकता
  6. मरीजों से लिए गए पैसे का हिसाब और टैक्स नियमों का पालन करना होता है।

🔹 (c) Emergency / Special Order

  • किसी क्षेत्र में डॉक्टरों की भारी कमी हो, तो कभी-कभी सरकार कॉन्ट्रैक्ट डॉक्टर को आंशिक अनुमति देती है।
  • लेकिन यह बहुत रेयर केस है और फाइल पर लिखित आदेश होना जरूरी है।

3. किन परिस्थितियों में बिल्कुल भी क्लीनिक नहीं चला सकते?

  • NPA लेने वाले डॉक्टर
  • RHO (Rural Health Officer), BMO, CHMO जैसे प्रशासनिक अधिकारी
  • PG रेजिडेंट्स या ट्रेनिंग/बॉन्ड पर कार्यरत डॉक्टर
  • सरकारी अस्पताल की दवा/स्टाफ/इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रयोग करके प्राइवेट प्रैक्टिस करना
  • ड्यूटी समय में प्राइवेट क्लीनिक चलाना

इन स्थितियों में यह सीधा अनुशासनात्मक अपराध माना जाता है और कार्रवाई के अंतर्गत –

  • निलंबन (Suspension)
  • विभागीय जांच (Departmental Inquiry)
  • सैलरी/पेंशन रोकना
  • IPC/BNS की धाराएं (धोखाधड़ी, जनता की जान से खिलवाड़)

लागू हो सकती हैं।


4. कानूनी प्रावधान

  1. क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट, 2010 → पंजीकरण के बिना क्लीनिक चलाना अपराध।
  2. MCI (अब NMC) Code of Ethics Regulations → सरकारी डॉक्टर बिना अनुमति प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकता।
  3. BNS (Bharatiya Nyaya Sanhita)
    • धारा 336: जीवन को खतरे में डालने वाला कार्य
    • धारा 420: धोखाधड़ी (अगर आर्थिक लाभ लिया गया)
  4. राज्य सिविल सेवा नियम → अनुशासनात्मक कार्यवाही का आधार।

5. उदाहरण (कब संभव है, कब नहीं)

  • संभव है:
    • डॉक्टर ने NPA छोड़ दिया हो।
    • सरकार से लिखित अनुमति ली हो।
    • ड्यूटी के बाद 2–3 घंटे के लिए, पंजीकृत क्लीनिक से कार्य कर रहा हो।
  • संभव नहीं है:
    • सरकारी डॉक्टर को NPA मिल रहा है।
    • बिना अनुमति घर पर मरीज देख रहा है।
    • सरकारी अस्पताल की दवाइयाँ/उपकरण अपने घर पर उपयोग कर रहा है।
    • ड्यूटी के समय क्लीनिक चला रहा है।

निष्कर्ष
एक सरकारी डॉक्टर अपने घर पर तभी क्लीनिक चला सकता है जब –

  1. उसने NPA छोड़ दिया हो,
  2. सरकार/स्वास्थ्य विभाग से लिखित अनुमति ली हो,
  3. ड्यूटी समय के बाद,
  4. और क्लीनिक क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत रजिस्टर्ड हो।

वरना यह पूरी तरह अवैध और दंडनीय है।


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