स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर धरमजयगढ़ का मुख्य समारोह बच्चों के उत्साह के बजाय अव्यस्था और लापरवाही की भेंट चढ़ गया | जिस कार्यक्रम का केंद्र बिंदु स्कूली बच्चे थे, वहीं सबसे ज्यादा असुविधा झेलते नज़र आए |
मंच पर नेताओं और उनके समर्थकों के लिए आरामदायक कुर्सियाँ सजी रही, जबकि महीनों की तैयारी के बाद प्रस्तुति देने आए बच्चे ज़मीन पर बैठकर, भीड़ में घुस कर या कुर्सीयों पर चढ़कर अपना कार्यक्रम देखने को मजबूर थे |कई जगह खड़े हो गए दर्शकों ने पीछे बैठे लोगों का दृश्य पूरी तरह रोक दिया, और लोग कार्यक्रम देखने के लिए मशक्कत करते रहे |
स्थिति इतनी ख़तरनाक हो गई कि अगर किसी बच्चे का पैर फिसल जाता तो हादसा तय था | लेकिन मंच पर बैठे जिम्मेदार नेता और आयोजक सिर्फ निर्देश देते रहे — “नीचे उतर जाओ ” — समस्या के समाधान के बजाय |
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कार्यक्रम बच्चों के सम्मान और सुरक्षा के बजाय नेताओं की शोभा बढ़ाने का मंच बन गया |रास्ट्रीय पर्व पर ऐसी अव्यवस्था ने न केवल कार्यक्रम की गरिमा को धूमिल किया, बल्कि प्रशाशन कीकार्यप्रडाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिये |