मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय: बेबसी में उम्मीद की करुण पुकार……
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आठ वर्षों से हाथीपांव के असहनीय दर्द से कराहते राजेन्द्र को सीएम कैंप कार्यालय से मिली आस की एक धुंधली किरण

मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय: बेबसी में उम्मीद की करुण पुकार
आठ वर्षों से हाथीपांव के असहनीय दर्द से कराहते राजेन्द्र को सीएम कैंप कार्यालय से मिली आस की एक धुंधली किरण
जशपुरनगर, 15 अप्रैल 2025/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का सीएम कैंप कार्यालय बगिया, जहां अक्सर फरियादियों की उम्मीदें पलती हैं, आज एक ऐसी करुण कहानी का गवाह बना जिसने हर सुनने वाले के हृदय को द्रवित कर दिया। आठ वर्षों से हाथीपांव की पीड़ादायक बेड़ियों में जकड़े, पत्थलगांव विकास खंड के पुरानी बस्ती के निवासी श्री राजेन्द्र सारथी, अपनी अंतिम उम्मीद लेकर इस चौखट पर पहुंचे। उनकी आंखों में बरसों की बेबसी और दर्द की गहरी छाया थी।
जिंदगी की मार: बीमारी, गरीबी और अकेलेपन के अथाह सागर में डूबे राजेन्द्र को मिली क्षणिक सहारा
पीड़ित राजेन्द्र सारथी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में अपनी व्यथा सुनाई, हर शब्द में बरसों का असहनीय दर्द और निराशा घुली हुई थी। उनकी करुण पुकार सुनकर, वहां मौजूद लोगों का हृदय भीग गया। तत्काल मानवीय संवेदना दिखाते हुए, उन्हें एम्बुलेंस के ठंडे फर्श पर लिटाकर जशपुर जिला चिकित्सालय भेजा गया, मानो एक डूबते हुए को तिनके का सहारा मिला हो।
एक टूटे हुए परिवार की दर्दनाक कहानी: पत्नी ने छोड़ा, बूढ़ी मां और मासूम बेटी के आंसुओं का बोझ
राजेन्द्र सारथी की कहानी किसी पत्थर दिल को भी पिघला देने वाली है। बीमारी ने उनके शरीर को तोड़ा ही था, ऊपर से नियति ने उनके जीवन में और भी गहरे घाव दिए। ऑपरेशन भी उनके दुख को कम न कर सका। लंबे समय तक आर्थिक तंगी और बीमारी से जूझते हुए, उनकी जीवनसंगिनी भी उनका साथ छोड़ गई। अब, एक बूढ़ी मां कमजोर कंधों पर अपने बीमार बेटे और उसकी पांच साल की मासूम बेटी के आंसुओं का बोझ उठाए हुए है।
एक अनिश्चित भविष्य की ओर: बेहतर इलाज के लिए राजेन्द्र को ले जाया जाएगा रायपुर
जिला चिकित्सालय में शुरुआती राहत के बाद, राजेन्द्र को अब बेहतर इलाज की उम्मीद में रायपुर भेजा जाएगा। अनजान शहर में, विशेषज्ञों की निगाहों में शायद उनके दुख का कोई अंत हो। यह उम्मीद की एक पतली डोर है, जिस पर एक बेबस इंसान का भविष्य टिका हुआ है।
सिसकते हुए राजेन्द्र ने मुख्यमंत्री और सीएम कैंप कार्यालय को दिया धन्यवाद: “जब सब दरवाजे बंद हो गए थे…”
अपनी कमजोर आवाज में, राजेन्द्र सारथी ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और सीएम कैंप कार्यालय का आभार व्यक्त किया। उनके शब्द लड़खड़ा रहे थे, आंखों में कृतज्ञता के आंसू थे। उन्होंने कहा, “जब मेरे लिए दुनिया के सभी दरवाजे बंद हो गए थे, तब सीएम कैंप कार्यालय ने उम्मीद की एक धुंधली सी किरण दिखाई है। शायद… शायद अब मेरे दुख का अंत हो।” उनके ये शब्द वहां मौजूद हर व्यक्ति के हृदय को छू गए।
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