March 2, 2026

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पत्थलगांव बस स्टैंड गेट पर जानलेवा गड्ढे – प्रशासन की गहरी नींद और जनता का आक्रोश

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पत्थलगांव (जशपुर):
पत्थलगांव नगर का जीवन रेखा कहा जाने वाला बस स्टैंड, जो प्रतिदिन हजारों यात्रियों की आवाजाही का साक्षी है, आज उपेक्षा और बदहाली की दर्दनाक कहानी बयां कर रहा है। इस महत्वपूर्ण स्थान के मुख्य प्रवेश द्वार पर बने दो विशाल और खतरनाक गड्ढे न केवल यातायात व्यवस्था को बुरी तरह से बाधित कर रहे हैं, बल्कि ये कभी भी एक गंभीर और जानलेवा दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।

इन गड्ढों की भयावह स्थिति ने स्थानीय नागरिकों में गहरा आक्रोश और चिंता पैदा कर दी है, वहीं प्रशासन की कथित निष्क्रियता सवालों के घेरे में है।


प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार,

ये गड्ढे काफी समय से मौजूद हैं और इनकी गहराई लगातार बढ़ती जा रही है। बरसात के मौसम में इनमें पानी भर जाने से इनकी वास्तविक गहराई का अंदाजा लगाना और भी मुश्किल हो जाता है, जिससे अनजान राहगीरों के इनमें गिरने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। रात के अंधेरे में, जब आसपास की दुकानें और होटल अपनी रोशनी से जगमगाते हैं, तो इन गड्ढों की उपस्थिति और भी खतरनाक हो जाती है। भीड़भाड़ और रोशनी के भ्रम में यात्री और स्थानीय लोग आसानी से इनका शिकार बन सकते हैं।


यह विडंबना ही है कि पत्थलगांव शहर का मुख्य प्रवेश द्वार ऐसी दयनीय स्थिति में है। यह स्थान न केवल बाहरी लोगों के लिए शहर का पहला परिचय है, बल्कि स्थानीय निवासियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण आवागमन का केंद्र है। इन गड्ढों की मौजूदगी शहर की छवि को धूमिल करती है और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।


स्थानीय नागरिकों का धैर्य अब जवाब दे रहा है

उनका कहना है कि इन गड्ढों की समस्या को लेकर कई बार नगर पंचायत कार्यालय और संबंधित अधिकारियों को मौखिक और लिखित रूप से सूचित किया गया है, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से अब तक इस दिशा में कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया गया है। न तो इन खतरनाक गड्ढों के आसपास कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया है, न ही सुरक्षा के लिए कोई बैरिकेडिंग की गई है। मरम्मत कार्य की तो बात ही दूर, ऐसा लगता है कि प्रशासन इस समस्या से पूरी तरह से बेखबर है या फिर जानबूझकर आंखें मूंद रहा है।


इस गंभीर मुद्दे पर स्थानीय निवासी खुलकर अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं

उनका सवाल है- कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, तभी उसकी नींद टूटेगी? क्या पत्थलगांव की जनता को बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षित वातावरण का भी अधिकार नहीं है? सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि अगर यही जानलेवा गड्ढा किसी बड़े सरकारी अधिकारी या किसी जनप्रतिनिधि के आवास के बाहर होता, तो क्या तब भी प्रशासन इसी तरह चुप्पी साधे रहता? निश्चित रूप से नहीं, तब तत्काल कार्रवाई होती और रातों-रात सड़क दुरुस्त कर दी जाती। यह दोहरा रवैया स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि आम नागरिकों की जान और सुरक्षा प्रशासन के लिए कितनी कम मायने रखती है।


अब यह मामला केवल गड्ढों की मरम्मत तक सीमित नहीं रह गया है। यह प्रशासन की संवेदनहीनता, लापरवाही और जनता के प्रति उसकी जवाबदेही पर एक बड़ा प्रश्न खड़ा करता है। पत्थलगांव की जनता अब जाग चुकी है और वह इस उपेक्षा का करारा जवाब मांगने के लिए तैयार है। उन्हें यह जानना है कि इन गड्ढों की जिम्मेदारी कौन लेगा और कब उन्हें एक सुरक्षित और सुगम आवागमन का अधिकार मिलेगा। यदि प्रशासन ने तत्काल इस समस्या का समाधान नहीं किया, तो यह निश्चित रूप से एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले सकता है।


जिम्मेदार कौन?


👉क्या नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) अपनी कुर्सी पर बैठकर शहर की इस प्रमुख समस्या को अनदेखा कर रहे हैं?
👉क्या नगर पंचायत अध्यक्ष की प्राथमिकताएं जन सुरक्षा से ऊपर हैं?
👉वार्ड क्रमांक 11 की नव-निर्वाचित पार्षद, जिन्होंने विकास और सुरक्षा का वादा किया था, उनकी चुप्पी क्या उनकी विफलता का प्रमाण नहीं है?


पत्थलगांव की जनता अब जवाब चाहती है

उन्हें यह जानना है – कि उनके टैक्स के पैसे का इस्तेमाल कहाँ हो रहा है और क्यों उन्हें ऐसी खतरनाक परिस्थितियों में जीने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यह सिर्फ गड्ढों का मामला नहीं, बल्कि प्रशासन की कार्यशैली और जनता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का मामला है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब अपनी गहरी नींद से जागता है और इन जानलेवा गड्ढों को भरकर पत्थलगांव के नागरिकों को राहत दिलाता है।

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